पिछले कई दशक से यहीं हो रहा था कार्यक्रम, जिम्मेदार नहीं देते ध्याना
शेरसिंह डागर
नूंह। मेवात की सबसे पुरानी शैक्षणिक संस्था यासीन मेव डिग्री कॉलेज की स्थिति इन दिनों बेहद खराब है। देश व प्रदेश को दर्जनों विधायक, मंत्री, सांसद व अफसर देने वाले इस कॉलेज पर किसी का ध्यान नहीं है। मेवात एजुकेशन बोर्ड की तरफ से सौ साल पहले 28 मार्च 1923 को शुरू की गई इस संस्था का कॉलेज आज जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। जलभराव के कारण यहां छात्र खेल गतिविधियों से दूर हैं। इतना ही नहीं यहां पिछले कई दशक से हर साल मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस भी कॉलेज की बदतर स्थिति के कारण इस बार पुलिस लाइन में मनाया जा रहा है। जलभराव के कारण यहां सैकड़ों पेड़ सूख चुके हैं। हर साल हो रही इस समस्या का जिला प्रशासन व कॉलेज प्रशासन स्थायी समाधान नहीं निकाल पा रहा है।
जानकारों का कहना है कि शहर के बीच में कार्यक्रम होना चाहिए था लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते दूर जाकर कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। जलभराव की चपेट में रहने से यहां कॉलेज व हॉस्टल की कई दशक पुरानी बिल्डिंग को भी नुकसान हो रहा है। छात्रों का कहना है कि कॉलेज में करीब बीस एकड़ का दोनों तरफ ग्राउंड है। लेकिन बारिश के समय ये पानी से लबालब हो जाता है। पानी अधिक होने पर इसे स्थायी तौर पर पंपसेट से हर साल निकाला जाता है। लेकिन इस बार अभी तक ग्राउंड में पानी है। इसके कारण कॉलेज में अनेक पुराने पेड़ सूख गए हैं। साथ ही छात्रों की खेल व अन्य गतिविधियां खत्म हो गई हैं। इससे बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है लेकिन, प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। पानी के कारण कॉलेज की बिल्डिंग में ऊपर तक सीलन चढ़ी हुई है। हाॅस्टल व लाइब्रेरी की बिल्डिंग को भी नुकसान हो रहा है। कॉलेज की हरियाली तेजी से खत्म हो रही है। छात्रों ने बताया जब से बरसात शुरू हुई है तब से कॉलेज में सभी खेल गतिविधियां बंद हैं। इसके अलावा छात्रों के घूमने फिरने के लिए भी स्थान का अभाव है।
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सपताल सिंगला, जुबेर, ताहिर हुसैन व कुलवंत, अनिल कुमार का कहना है कि कॉलेज में जलभराव से शहर की महिला-पुरुष व बच्चे भी परेशान हैं। क्योंकि शाम होते ही शहर की महिला पुरुष यहां घूमने के लिए तो बच्चे खेलने के लिए पहुंचते थे। क्योंकि शहर में पार्क व खेल स्टेडियम न होने के कारण कॉलेज शहर का सबसे प्रमुख स्थान है। यहां जलभराव का स्थायी समाधान किया जाए। यहां स्थायी ट्यूबवेल कराकर पंप हाउस के जरिये पानी को सीवर या फिर नूंह डिस्ट्रीब्यूटरी में डाला जाए। ताकि इस कॉलेज को बचाया जा सके। यह सबकी धरोहर है।
इस बारे में प्रशासन को पत्राचार किया है लेकिन अधिकारी इसे अभी भी प्राइवेट कॉलेज समझते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। पेड़ सूख गए, खेल गतिविधियां बंद हैं। बिल्डिंग को भी नुकसान हो रहा है। साथ ही शहर के लोग भी जलभराव के कारण यहां नहीं आ जा रहे हैं। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - डॉ. एजाज अहमद, प्रिंसिपल वाईएमडी कॉलेज।