- संशोधित एस्टीमेट दोबारा कृषि विपणन बोर्ड को भेजा गया, फिर टला निर्माण कार्य
- कागजों में दौड़ता 12.37 करोड़ का प्रोजेक्ट, नूंह में कृषि कार्यालय का इंतजार जारी
- 20 साल बाद भी नूंह में कृषि विभाग का अपना जिला कार्यालय नहीं, 12.37 करोड़ का प्रोजेक्ट फिर अटका
संवाद न्यूज एजेंसी, नूंह। कृषि आधारित जिला होने के बावजूद नूंह में आज तक कृषि विभाग का जिला स्तरीय कार्यालय नहीं बन पाया है। करीब 12 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से बनने वाले कार्यालय का निर्माण कार्य एक बार फिर तकनीकी कारणों से अटक गया है। विभाग की ओर से पहले तैयार की गई योजना में कुछ कमियां पाए जाने के बाद उसका शुद्धिकरण किया गया है और संशोधित एस्टीमेट दोबारा कृषि विपणन बोर्ड को भेजा गया है। इसके चलते निर्माण कार्य फिलहाल फिर टल गया है और अधिकारियों-कर्मचारियों को नए कार्यालय के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
जानकारी के अनुसार अब उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी सत्र में इस परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। प्रस्तावित कार्यालय भवन कृषि विभाग की करीब साढ़े चार एकड़ भूमि पर बनाया जाना है और इसके निर्माण पर होने वाला पूरा खर्च कृषि विपणन बोर्ड वहन करेगा। विभाग ने संशोधित एस्टीमेट तैयार कर चंडीगढ़ भेज दिया है, जिसे जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
दो दशक बाद भी अपना कार्यालय नहीं : नूंह को वर्ष 2005 में जिला का दर्जा मिला था, लेकिन दो दशक बीत जाने के बाद भी कई विभागों के पास आज भी अपना जिला कार्यालय नहीं है। कृषि विभाग भी उन्हीं में से एक है। वर्तमान में विभाग के अधिकारी अलग-अलग भवनों में काम करने को मजबूर हैं। जिला कृषि उपनिदेशक का कार्यालय रेडक्रॉस भवन में अस्थायी रूप से चल रहा है, जबकि कृषि विभाग का एक अन्य कार्यालय विभाग के पुराने अधिकारी के आवासीय मकान में संचालित हो रहा है।यह भवन अब काफी जर्जर हो चुका है और किसी भी समय हादसा होने का खतरा बना रहता है। कर्मचारियों और अधिकारियों को भी असुरक्षित माहौल में काम करना पड़ रहा है। कई बार इस भवन की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा चुकी है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
खेतों की मिट्टी और पानी की नियमित जांच नहीं हो पा रही : कार्यालय के अभाव का असर विभागीय कामकाज पर भी पड़ रहा है। पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण पानी और मिट्टी परीक्षण लैब का काम भी पूरी तरह से शुरू नहीं हो पा रहा है। लैब की सुविधा सक्रिय न होने से किसानों के खेतों की मिट्टी और पानी की जांच नियमित रूप से नहीं हो पा रही है, जिससे उन्हें आधुनिक और वैज्ञानिक खेती के तरीकों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि अगर मिट्टी और पानी की जांच की सुविधा सही तरीके से उपलब्ध हो जाए तो उन्हें फसल के लिए सही उर्वरक और पोषक तत्वों की जानकारी मिल सकेगी। इससे उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिलती है।
कार्यालय की कमी का एक और असर यह भी सामने आता है कि कई बार किसान अधिकारियों से मिलने के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकते रहते हैं। कई बार उन्हें बताया जाता है कि अधिकारी फील्ड में गए हुए हैं। किसानों का कहना है कि एक ही जगह पर कार्यालय होने से उन्हें अधिकारियों से मिलने और अपनी समस्याएं रखने में सुविधा होगी।
कृषि विभाग का जिला स्तरीय कार्यालय बनाने की योजना काफी समय से लंबित है। उन्होंने बताया कि करीब साढ़े चार एकड़ भूमि पर कार्यालय भवन बनाया जाएगा और इसकी अनुमानित लागत करीब 12 करोड़ रुपये है। विभाग की ओर से संशोधित एस्टीमेट तैयार कर पंचकूला भेज दिया गया है और उम्मीद है कि जल्द मंजूरी मिल जाएगी। -डॉ. अजीत सिंह, एसडीओ कृषि विभाग ।