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Gurugram News: पांच फीसदी मरीजों में मिल रही त्वचा सूखने की बीमारी

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ज्यादातर मामलों में जीन परिवर्तन (म्यूटेशन) के कारण हो रहा इथ्योसिस त्वचा रोग
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मूर्ति दलाल
गुरुग्राम। मछली जैसी त्वचा से पीड़ित पांच फीसदी मरीज इथ्योसिस रोग से पीड़ित हो रहे हैं। यह मरीज नागरिक अस्पताल में जांच के लिए पहुंच रहे हैं। रूखी और बेजान त्वचा के कारण यह मरीज अपने हाथ पैर हिलाने या सामान्य काम करने में समस्या महसूस कर रहे हैं। बीमारी के दुष्प्रभावों को कम करने में त्वचा रोग विशेषज्ञ मदद कर रहे हैं।

इस बीमारी से पीड़ित एक 16 वर्षीय किशोरी ने बताया कि वह वेस्टर्न कपड़े पहनने से परहेज करती है। रूखी त्वचा कपड़े के साथ फंस कर दर्द देती है। उसे यह बीमारी जन्मजात मिली है। नागरिक अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज मेहता बताते हैं कि जन्मजात और अन्य बीमारियों के कारण मरीज को इथ्योसिस होता है। यह लाइलाज बीमारी है। इलाज के जरिए केवल इसके प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। जिले में धर्म विशेष के लोगों में इस बीमारी से जुड़े चार फीसदी मामले मिल रहे हैं। इसमें एक ही परिवार के लोगों में विवाह संबंध के कारण यह बीमारी हो रही है।
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शेष एक फीसदी मामलों में मरीज के दूसरे रोग इस बीमारी का कारण बन रहे हैं। ऐसे मरीजों की त्वचा लाल या सफेद होकर शुष्क हो जाती है। इस पर खुजली होना सामान्य है। ज्यादातर मामलों में त्वचा लाल होकर शुष्क होने के बाद फटने लगती है। जीन परिवर्तन इसका वंशानुगत कारण है। जीन विकार वाले मामलों में सामान्य त्वचा का विकास प्रभावित होता है।
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गर्भावस्था में लगता है बीमारी का पता
डॉ. मेहता बताते हैं कि इथ्योसिस से पीड़ित दंपती गर्भावस्था के 12वें सप्ताह के बाद केरियोटाइपिंग जांच करा सकते हैं। यह रक्त जांच जीन क्रोमोसोम में किसी विकार का पता लगाने में मददगार है। इस जांच के जरिए भ्रूण में विकार किस हद तक विकसित होगा, इसकी जानकारी मिलती है। जांच के आधार पर माता पिता बच्चे के गर्भपात का निर्णय तक ले सकते हैं।
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