नागरिक अस्पताल में मरीजों की भीड़ से चरमराई व्यवस्था, एक बेड पर दो मरीजों का किया इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में शनिवार को बेड की भारी कमी के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बदलते मौसम के कारण अस्पताल में अचानक मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ, जिससे अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। अस्पताल प्रशासन ने संसाधनों की कमी से निपटने के लिए एक बेड, दो जिंदगी का ऐसा फॉर्मूला निकाला कि मरीज बीमारी भूलकर जगह बनाने की जद्दोजहद में लग गए।
बेड खाली न होने की सूरत में कई मरीजों को कुर्सी पर बैठाकर ही ड्रिप (ग्लूकोज) लगाई गई। इस अव्यवस्था को लेकर अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके तीमारदारों ने गहरा रोष व्यक्त किया। परिजनों का कहना है कि एक ही बेड पर दो मरीजों को रखने से उन्हें करवट बदलने तक की जगह नहीं मिल रही है, जिससे मरीजों की तकलीफ और बढ़ गई है। इसके अलावा, तीमारदारों ने चिंता जताई कि इस तरह एक साथ इलाज करने से मरीजों के बीच संक्रमण (क्रॉस-इंफेक्शन) फैलने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, इमरजेंसी वार्ड की क्षमता सीमित है, लेकिन शनिवार को क्षमता से कई गुना अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच गए। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि बदलते मौसम और महामारियों के सीजन को देखते हुए इमरजेंसी वार्ड में अतिरिक्त बेड की तत्काल व्यवस्था की जाए। तीमारदारों का कहना है कि यदि समय रहते अतिरिक्त वार्ड या बेड नहीं बढ़ाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार जिले में एक ही सरकारी अस्पताल होने की वजह से रेफर, सड़क दुर्घटना जैसे अधिक के मामले आते हैं। इसकी वजह से इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का दबाव ज्यादा रहता है।
बेड नहीं डॉक्टरों ने दिया है आश्वासन
बेड खाली नहीं होने पर मरीज को कुर्सी पर बैठाकर ड्रिप लगाई गई। डॉक्टरों ने बेड खाली होते ही उपलब्ध कराने की बात कही है। -कृष्ण, तीमारदार, बसई
बेड खाली नहीं होने के कारण मेरे पति के साथ एक अन्य मरीज का भी उसी बेड पर इलाज किया गया। इससे काफी असुविधा हो रही है। - रिया, तीमारदार, सेक्टर-48
मौसम में बदलाव के कारण इन दिनों अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है। इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद उनकी स्थिति के अनुसार वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। उपचार के बाद कई मरीजों को छुट्टी भी दे दी जाती है। - डॉ. नीना, पीएमओ, नागरिक अस्पताल, सेक्टर-10