यात्री ट्रेनों के ट्रैक का दबाव होगा कम
इन कॉरिडोर पर मालवाहक ट्रेनें चलने के बाद यात्री ट्रेनों के ट्रैक का दबाव कम होगा और यात्री गाड़ियां समय से अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगी। अभी अधिकतर मालगाड़ियां उन्हीं रेल लाइनों पर चलती हैं, जिन पर यात्री ट्रेनें चलती हैं। मालगाड़ियों को गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगता है। इसी वजह से ये दोनों कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। वेस्टर्न कॉरिडोर गुरुग्राम के सोहना से नूंह, रेवाड़ी से आगे राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कई शहरों के नजदीक से होकर गुजरेगा। लगभग 1504 किलोमीटर इस कॉरिडोर में लगभग 128 किलोमीटर हिस्सा दादरी से रेवाड़ी का है।
इस पैकेज में सोहना की अरावली में एक किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई गई है। इसकी चौड़ाई 15 मीटर और ऊंचाई 12 मीटर है। सुरंग से न केवल डबल डेकर ट्रेनें गुजर सकेंगी बल्कि एक साथ दो ट्रेनें निकलेंगी। सुरंग में ओवरहेड इलेक्ट्रिक उपकरण लगाए गए हैं। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लंबाई 1856 किलोमीटर होगी। इन कॉरिडोर में डेढ़ से दो किलोमीटर लंबी मालवाहक ट्रेनें चलेंगी।
सोहना के बीच नवंबर में ट्रायल की तैयारी है। इस पैकेज (भाग) में ही अरावली पहाड़ी क्षेत्र में एक किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई गई है। दिसंबर तक रेवाड़ी-दादरी पैकेज तैयार करने का प्रयास है।
- वाईपी शर्मा, अतिरिक्त मुख्य महाप्रबंधक, डब्ल्यूडीएफसी