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आंख में एक साल से घुसा था एक सेमी का टुकड़ा: गुरुग्राम में इराक के युवक की हुई सर्जरी, विस्फोट में लगी थी चोट

Thu, 17 Sep 2026 06:01 PM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम

सार

इराक के 18 वर्षीय युवक की दाहिनी आंख में फंसा एक सेंटीमीटर धातु का टुकड़ा शैल्बी इंटरनेशनल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने पांच घंटे की जटिल सर्जरी से निकाला। इससे उसकी बची रोशनी सुरक्षित रही।

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जटिल सर्जरी से बची आंख - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सालभर पहले एक विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुए इराक के 18 वर्षीय युवक की दाहिनी आंख में करीब एक सेंटीमीटर लंबा धातु का टुकड़ा फंस गया था। चोट के कारण उसकी आंख की करीब 70 प्रतिशत रोशनी प्रभावित हो गई थी। धातु का टुकड़ा ऑप्टिक नर्व के पास फंसा होने के कारण आंख हिलाने पर लगातार दर्द रहता था। जटिलता को देखते हुए कई अस्पतालों ने सर्जरी करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद युवक शैल्बी इंटरनेशनल हॉस्पिटल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने करीब पांच घंटे की सर्जरी कर धातु के टुकड़े को बाहर निकाला और आंख की बची हुई रोशनी को सुरक्षित रखने में सफलता पाई।

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सर्जरी न्यूरोसर्जरी एवं स्कल बेस सर्जरी टीम के नेतृत्व में की गई। टीम का नेतृत्व न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक एवं एचओडी डॉ. हरनारायण सिंह ने किया। डॉक्टरों के सामने चुनौती केवल धातु के टुकड़े को निकालना नहीं थी, बल्कि पहले से घायल आंख और ऑप्टिक नर्व को किसी अतिरिक्त नुकसान से बचाना भी था।
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डॉक्टरों ने धातु के टुकड़े तक पहुंचने के लिए नाक के रास्ते एंडोस्कोपिक एंडोनैसल तकनीक से सर्जरी करने का निर्णय लिया। ईएनटी विभाग के वरिष्ठ कंसल्टेंट एवं एचओडी डॉ. कुणाल निगम के अनुसार, टुकड़े की स्थिति को देखते हुए नाक के रास्ते सर्जरी करना उचित विकल्प था। करीब पांच घंटे चली प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक करीब एक सेंटीमीटर लंबे धातु के टुकड़े को बाहर निकाला। डॉ. हरनारायण सिंह ने कहा कि चोट के कारण मरीज की दृष्टि पहले ही काफी प्रभावित हो चुकी थी। ऐसे में सर्जरी के हर चरण में विशेष सावधानी बरतनी पड़ी। 
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