सर्जरी न्यूरोसर्जरी एवं स्कल बेस सर्जरी टीम के नेतृत्व में की गई। टीम का नेतृत्व न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक एवं एचओडी डॉ. हरनारायण सिंह ने किया। डॉक्टरों के सामने चुनौती केवल धातु के टुकड़े को निकालना नहीं थी, बल्कि पहले से घायल आंख और ऑप्टिक नर्व को किसी अतिरिक्त नुकसान से बचाना भी था।
डॉक्टरों ने धातु के टुकड़े तक पहुंचने के लिए नाक के रास्ते एंडोस्कोपिक एंडोनैसल तकनीक से सर्जरी करने का निर्णय लिया। ईएनटी विभाग के वरिष्ठ कंसल्टेंट एवं एचओडी डॉ. कुणाल निगम के अनुसार, टुकड़े की स्थिति को देखते हुए नाक के रास्ते सर्जरी करना उचित विकल्प था। करीब पांच घंटे चली प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक करीब एक सेंटीमीटर लंबे धातु के टुकड़े को बाहर निकाला। डॉ. हरनारायण सिंह ने कहा कि चोट के कारण मरीज की दृष्टि पहले ही काफी प्रभावित हो चुकी थी। ऐसे में सर्जरी के हर चरण में विशेष सावधानी बरतनी पड़ी।