एनएचएआई और ग्रामीण एक दूसरे पर लगा रहे आरोप, नहीं हो पा रहा काम शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दिल्ली-जयपुर हाईवे का सफर सुहाना और आरामदायक बनाने की एनएचएआई की तैयारियों को फिलहाल झटका लग गया है। मानेसर में बनने वाले एलिवेटेड रोड को लेकर मंदिर की जमीन का विवाद गहरा रहा है। ग्रामीण और एनएचएआई एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। एनएचएआई का कहना है कि मंदिर की दीवार तोड़े बगैर एलिवेटेड रोड का निर्माण संभव नहीं है, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क के उस पार पर्याप्त जमीन है, मंदिर को छेड़े बगैर भी एलिवेटेड रोड का निर्माण हो सकता है, लेकिन एनएचएआई समय पर काम नहीं करने के बहाने खोज रहा है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से दो दिन पहले हुई मुलाकात के दौरान स्थानीय सांसद एवं केंद्र में राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने जब बिलासपुर, बावल चौक पर फ्लाईओवर और मानेसर के एलिवेटेड रोड के निर्माण में देरी की बात गडकरी को बताई तो केंद्रीय मंत्री ने तत्काल परियोजना से जुड़े अधिकारियों से जवाब तलब किया।
एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि एलिवेटेड रोड के निर्माण में मानेसर के बाबा भीष्म मंदिर की दीवार बाधा बन रही है। इसे हटाए बगैर एलिवेटेड रोड का निर्माण आरंभ नहीं किया जा सकता है। दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर की जमीन कहीं बाधा नहीं बन रही, एनएचएआई की नियत और काम न करने के बहाने बाधा बन रहे हैं।
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दूसरी तरफ हो सकता है निर्माण
गांव के पूर्व सरपंच ओमप्रकाश यादव के अनुसार ग्रामीणों के सामने पहले शर्त रखी जाती है फिर बहाने बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोड के उस पार बने मकानों का अधिग्रहण एनएचएआई कर चुका है, मुआवजा भी दिया जा चुका है। मकान खाली कराकर निर्माण शुरू क्यों नहीं किया जा रहा है, यह समझ से परे हैं। मंदिर की दीवार की बहाना केवल बहाना बनाया जा रहा है। दूसरी तरफ पर्याप्त जमीन है।
यूथ फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव के अनुसार मंदिर की एक इंच जमीन भी एलिवेटेड रोड में बाधा नहीं है। उन्होंने भी एनएचएआई पर सवाल उठाए। धर्मेंद्र ने कहा कि ग्रामीण मंदिर की दीवार किसी कीमत पर नहीं तोड़ने देंगे।