मानेसर मजदूर आंदोलन के समर्थन और वेतन मुद्दे के लिए सड़कों पर उतरे कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। न्यूनतम वेतन और मानेसर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुए श्रमिकों की रिहाई के लिए बृहस्पतिवार को लघु सचिवालय के सामने बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के बैनर तले हुए प्रदर्शन का नगर निगम के हजारों कर्मचारियों ने भी समर्थन दिया। उन्होंने आंदोलन के समर्थन में तीन घंटे काम बंद रखा। प्रदर्शन का केंद्र मानेसर में चल रहा श्रमिक आंदोलन रहा, जहां वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे श्रमिकों पर कार्रवाई के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। सीटू नेताओं ने आरोप लगाया कि श्रमिकों की आवाज को पुलिस बल के जरिये दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि 20 महिलाओं समेत 55 श्रमिकों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
जिला प्रधान निरंतर पाराशर और जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल की अगुवाई में राजस्थान भवन के पास आयोजित सभा में नेताओं ने कहा कि यदि सरकार समय पर न्यूनतम वेतन लागू कर देती तो ऐसे हालात नहीं होते। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में श्रमिक महंगाई, बढ़ते किराये और रोजमर्रा के खर्चों के दबाव में जीने को मजबूर हैं।
न्यूनतम वेतन पर सरकार की नीति पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान सीटू के महासचिव जय भगवान ने सरकार की वेतन नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने 2 मार्च को 15220 रुपये न्यूनतम वेतन घोषित किया। इसके बावजूद अब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। इससे श्रमिकों में असंतोष और बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में लंबे समय से वेतन संशोधन लंबित था जबकि एनसीआर क्षेत्र में वेतन समानता का सिद्धांत लागू होना चाहिए। दिल्ली में न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये से अधिक है जबकि हरियाणा में लंबे समय तक यह 11274 रुपये तक सीमित रहा। ट्रेड यूनियनों ने समिति के जरिये 23,196 रुपये का प्रस्ताव भी पारित कराया लेकिन उसे लागू नहीं किया गया।
श्रमिकों की स्थितियां बनी चिंता का कारण
प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों की खराब कार्य स्थितियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने कहा कि कई उद्योगों में ओवरटाइम का भुगतान नियमों के अनुसार नहीं किया जा रहा है। ठेका श्रमिकों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रहीं और कंपनी परिसरों में शौचालय व कैंटीन जैसी सुविधाओं का अभाव है। त्योहारों पर छुट्टियां न मिलना, बोनस का भुगतान न होना और अस्थायी कर्मचारियों को भोजन तक न मिलना जैसी समस्याएं भी सामने रखी गईं। नेताओं ने ठेका प्रथा समाप्त करने, सभी श्रमिकों को स्थायी करने और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराने की मांग दोहराई।
नगर निगम कर्मचारियों ने दिया समर्थन
नगर निगम के तीन हजार से अधिक कर्मचारियों ने तीन घंटे का सांकेतिक कार्य बहिष्कार कर आंदोलन को समर्थन दिया। कर्मचारियों ने निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए न्यूनतम वेतन बढ़ाने, घोषित वेतन लागू करने और अग्निशमन विभाग के शहीद कर्मचारियों को सम्मान व मुआवजा देने की मांग उठाई। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार और विभाग की वादाखिलाफी के कारण कर्मचारियों को बार-बार आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 1 और 2 मई को राज्यव्यापी हड़ताल की जाएगी।
वेतन असमानता, महंगाई और अस्थायी रोजगार है मुख्य समस्या
फरीदाबाद और मानेसर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते इस असंतोष को विशेषज्ञ गंभीर संकेत मान रहे हैं। लाखों श्रमिकों वाले इस क्षेत्र में वेतन असमानता, महंगाई और अस्थायी रोजगार जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल श्रमिक संगठनों ने सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की है।