-150 रुपये से लेकर 22,000 रुपये तक की रेंज, गाय के गोबर से बनी इको फ्रेंडली प्रतिमाएं आगरा से बनकर आ रहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम।
गणेश चतुर्थी के स्वागत के लिए शहर के बाजार पूरी तरह सज चुके हैं। सदर बाजार, हुड्डा मार्केट सहित शहर के तमाम हिस्सों में गणेश मूर्तियों की बिक्री जोरों पर है। बाल स्वरूप में बैठे बप्पा लोगों को लुभा रहे हैं तो मयूर वाहन और नंदी पर बैठे गणपति की प्रतिमाओं की भी खासी मांग है। इस बार प्रतिमा बनाने वालों ने ऑनलाइन ऑर्डर की सुविधा दी है। खासकर इको फ्रेंडली गणेश मूर्तियों के ऑर्डर दे रहे हैं। इन प्रतिमाओं को पीओपी की जगह मिट्टी से बनाकर चटकीले रंगों से सजाया जा रहा है जो एकदम बोलती हुई महसूस हो रही हैं।
मूर्तियों की कीमत 150 रुपये से शुरू होकर 22,000 रुपये तक हैं। ग्राहकों की जरूरत और बजट के अनुसार 15 सेंटीमीटर से लेकर नौ फीट तक की मूर्तियां तैयार की गई हैं। सेक्टर 14 स्थित पप्पू मूर्तिकार का कहना है कि वे पिछले 25 वर्षों से यह काम कर रहे हैं, लेकिन इस बार ग्राहक कुछ अलग और अनोखे डिजाइन की डिमांड कर रहे हैं। पारंपरिक बैठे हुए गणपति के अलावा इस बार खास डिजाइनों में झूले पर झूलते बप्पा, मयूर वाहन पर विराजमान गणपति, शेष नाग और नंदी पर बैठे गणपति, बाल स्वरूप में बप्पा और आधुनिक अंदाज वाली मूर्तियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।
ऑनलाइन ऑर्डर का बढ़ा क्रेज
गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। सेक्टर 90 की मूर्तिकार आंचल अग्रवाल बताती हैं कि ऑनलाइन ऑर्डर की सुविधा से दूर-दराज के लोग भी आसानी से मनपसंद इको फ्रेंडली मूर्तियां मंगा रहे हैं। इससे बाजारों में रौनक बढ़ गई है। पारंपरिक से लेकर आधुनिक डिजाइनों तक की मूर्तियां लोगों को खूब लुभा रही हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री में इस बार खासा इजाफा हुआ है।
आगरा से बनकर आती हैं गणेश प्रतिमाएं
बाजारों में बिक रही ज्यादातर गणेश प्रतिमाएं आगरा से मंगवाई जा रही है। आगरा में गणेश चतुर्थी को लेकर बड़े पैमाने पर प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है। कुशल कारीगर पारंपरिक शैली में आकर्षक और इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार करते हैं। ये मूर्तियां चिकनी मिट्टी से बनी होती हैं और सुंदर रंगों से सजाई जाती हैं। मांग बढ़ने पर आगरा से रोजाना मूर्तियों की आपूर्ति हो रही है। यहां पर उन्हें लाकर डिमांड पर पेंट किया जाता है।
दुकानदारों से बातचीत
हम लोग राजस्थान से आए हुए हैं, पूरे परिवार के साथ मूर्तियां तैयार करते हैं। सभी मूर्तियां आगरा से मंगाई जाती हैं, यहां पर लाकर इन पर पेंट किया जाता है। पेंट भी इको फ्रेंडली किया जाता है जिससे वातावरण कोई नुकसान न हो।
बहरुम, मूर्तिकार