संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखनगर। अनाजमंडी में गेहूं की धीमी उठान के कारण किसानों, आढ़तियों और कामगारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में अब तक 90 हजार क्विंटल गेहूं की आवक शुरू हो चुकी है। सरसों और जौ भी भारी मात्रा में पड़ा हुआ है। इस वजह से मंडी में जगह कम हो गई है और खुले आसमान में रखा गेहूं बारिश या खराब होने के डर से संकट में है।
बोरियों के ढेर लग जाने से नए गेहूं के लिए जगह नहीं बची है। लिफ्टिंग और खरीद प्रक्रिया धीमी होने के कारण आढ़तियों को 72 घंटे में भुगतान मिलने में परेशानी हो रही है, जिससे किसानों को भुगतान मिलने में भी देरी हो रही है। अनाज न उठने से लेबर को काम नहीं मिल पा रहा है और उनका रोजमर्रा का गुजारा मुश्किल हो गया है। ट्रांसपोर्टरों की कमी या टेंडर शर्तों से असहमति के कारण लिफ्टिंग प्रभावित हो रही है। नियमों के अनुसार गेहूं 24-48 घंटे में उठाना अनिवार्य है, लेकिन फर्रुखनगर मंडी में 72 घंटे बीतने के बाद भी समस्या बनी हुई है।
हरियाणा वेयरहाउसिंग कंपनी और हैफेड की स्थानीय मैनेजर सुमन ने बताया कि बेमौसम बारिश की वजह से अभी सिर्फ छह हजार क्विंटल गेहूं का ही उठान हो पाया है। गीला अनाज होने के कारण खरीद भी प्रभावित हो रही है। अधिकारी नोटिस जारी कर रहे हैं और जल्द लिफ्टिंग का आश्वासन दे रहे हैं।