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Gurugram News: डीएलएफ और पालम विहार क्षेत्र से मलबा हटाने का कार्य शुरू

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डीएलएफ और पालम विहार क्षेत्र से मलबा हटाने का कार्य शुरू
सी एंड डी वेस्ट को बसई संयंत्र पर भेजा जा रहा है

अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। डीएलएफ और पालम विहार क्षेत्र से मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। मलबे को बसई स्थित नगर निगम के प्रोसेसिंग प्लांट पर भेजा जा रहा है।
जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन) विभाग की कार्रवाई के बाद कई दिनों से सड़कों पर मलबा पड़ा हुआ है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डीटीपीई अमित मधोलिया ने बताया कि मलबे को नगर निगम के निर्धारित केंद्र पर भेजा जा रहा है और जल्द ही सड़कों से इसे हटवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि तोड़फोड़ के दौरान निकले कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन (सी एंड डी) वेस्ट को पालम विहार क्षेत्र में वेंडर द्वारा एकत्रित किया जा रहा है। इस कचरे का निपटान नगर निगम के बसई प्लांट पर किया जाएगा। डीएलएफ ने अपने क्षेत्र में सफाई कार्य पहले ही शुरू कर दिया गया है।
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बता दें कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (प्रवर्तन) विभाग ने लाइसेंस कॉलोनियों में अवैध कब्जों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया था। पांच दिनों तक चले इस महाअभियान में 6,000 से अधिक मकानों के बाहर से अतिक्रमण हटाया गया। इस अभियान के तहत डीएलएफ फेज-1 और फेज-2, साउथ सिटी-1, साउथ सिटी-2, सुशांत लोक, सुशांत लोक-2, सुशांत लोक-3, सनसिटी, ग्रीनवुड सिटी, आरडी सिटी, विपुल वर्ल्ड, रोजवुड सिटी, निर्वाणा कंट्री, मालिबू टाउन, मेफील्ड गार्डन, गार्डन सिटी, उप्पल साउथेंड और पालम विहार सहित कई कॉलोनियों में कार्रवाई की गई। इस दौरान राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू), ग्रीन बेल्ट और सार्वजनिक स्थानों पर किए गए अतिक्रमण को बड़े स्तर पर हटाया गया था।
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निगम की सख्ती के बाद डीटीपीई हरकत में आया
मलबे के निपटान को लेकर नगर निगम ने सख्ती दिखाई थी। नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया था कि संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करें कि तोड़फोड़ के दौरान निकलने वाला मलबा केवल निर्धारित स्थान पर ही डाला जाए। इस संबंध में जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन) को भी निर्देश जारी किए गए थे। आदेश में कहा गया था कि कचरा उत्पन्न करने वाले व्यक्ति या संस्था को इसे निर्धारित प्रोसेसिंग प्लांट या कलेक्शन सेंटर पर ही जमा कराना होगा। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि यदि नियमों की अनदेखी पाई गई तो संबंधित के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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