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Gurugram News: डार्क रूम पर अंधेरा, डिजिटल फोटोग्राफी युग में खो गए आर्टिस्ट

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फोटोग्राफी दिवस विशेष
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ब्लैक एंड व्हाइट फोटो को ब्रश से कलर करने वाले नहीं आते अब नजर
दिनेश कुमार

गुरुग्राम। तकनीकी युग में जैसे-जैसे विकास हुआ वैसे ही फोटोग्राफी करने के लिए डिजिटल कैमरे, मोबाइल फोन कैमरे, फोटोशॉप आदि सॉफ्टवेयर आ गए, जिससे फोटोग्राफी आसान हो गई। हर कोई फोन से फोटोग्राफी कर एप के द्वारा किसी भी तरह का फोटो बना लेता है। इस डिजिटल युग में फोटोग्राफर व ब्लैक एंड व्हाइट फोटो को ब्रश से कलर करने वाले तथा डार्क रूम में डिजाइन बनाने वाले आर्टिस्ट फोटोग्राफर खत्म हो गए। डार्क रूम तो हर स्टूडियो से खत्म ही हो गए हैं। लोगों को ब्लैक एंड व्हाइट फोटो बनाने वाले केमिकल के नाम भी याद नहीं है। कैमरे की फिल्म के एक ही नेगेटिव पर तीन से चार फोटो एक्सपोज करने वाला तो समय ही चला गया, इन सब की जगह डिजिटल ने ली है।

वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर यतिन वर्मा ने बताया कि तकनीकी के दौर में अब बाजार में बहुत अच्छे-अच्छे उपकरण आ गए हैं, जिससे फोटोग्राफी करना आसान हो गया है। यतिन वर्मा ने कहा कि पहले फोटोग्राफी सीखने के लिए दो से तीन साल लग जाते थे, लेकिन अब डिजिटल कैमरे आने से कोई भी फोटोग्राफी कर सकता है।
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गुरुग्राम में 1982 से फोटोग्राफी कर रहे धर्मपाल चावला व रमेश यादव ने बताया कि विश्व फोटोग्राफी दिवस हर साल 19 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस फोटोग्राफी की कला के द्वारा दुनिया भर के फोटोग्राफरों को एक साथ लाने का एक अवसर है। उन्होंने बताया कि जब से डिजिटल कैमरे आए हैं तब से फोटोग्राफी खत्म ही हो गई है। कैमरे की फिल्म पर फोटोग्राफी करने वाला फोटोग्राफर फोकस व कंपोजिशन का पूरा ध्यान रखता था, एक भी नेगेटिव खराब नहीं जाने देता था। अब एक फोटोग्राफर एक हजार फोटो कैप्चर करता है तो मुश्किल से दो सौ ही फोटो निकलते हैं। उन्होंने बताया कि डार्क रूम में फिल्म धोना व ब्लैक एंड व्हाइट फोटो बनाना और ब्लैक एंड व्हाइट फोटो को ब्रश से कलर करने वाले आर्टिस्ट फोटोग्राफर तो खत्म ही हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि अब सब सॉफ्टवेयर से फोटोशॉप पर हो जाता है, जिससे फोटोग्राफी आसान हो गई है।
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