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Gurugram News: सरस आजीविका मेले में वीकेंड पर उमड़ी भीड़

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शिवरात्रि पर पूजा सामग्री, रुद्राक्ष और शिव प्रतिमाएं जैसे स्टॉलों पर रही रौनक
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संवाद न्यूज एजेंसी

गुरुग्राम।
सरस आजीविका मेले में वीकेंड के दौरान लोगों की भीड़ देखने को मिली। महाशिवरात्रि को लेकर सरस मेला विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। शिवरात्रि पर विशेष पूजा सामग्री, रुद्राक्ष माला, शिव प्रतिमाएं तथा पारंपरिक साज-सज्जा के सामान की स्टॉलों पर खास रौनक रही।

मध्यप्रदेश पवेलियन में स्टाॅल नंबर 229 की लड़कों बाई ने शिवजी और पार्वती की पीतल की ऐसी मूर्तियां बनाईं हैं जो लोगों का विशेषकर ध्यान आकर्षित कर रही हैं। लड़कों बाई बताती हैं कि ये मूर्तियां बनाना आसान काम नहीं है। पहले पीतल को सांचे में डाला जाता है, उसके बाद मूर्ति को बनने में 5 दिन का समय लगता है। उन्हें यह काम करते हुए आज 15 से 20 साल हो गए हैं। मेले में पहुंचे खरीदारों ने हस्तशिल्प, हथकरघा और ग्रामीण उत्पादों की जमकर खरीदारी की। मेले में सांस्कृतिक संध्या के तहत लोकनृत्य और संगीत कार्यक्रमों ने लोगों का मन मोह लिया। इस मेले के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला।
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धान के बालियों से बनी मूर्तियां आकर्षण का केंद्र

ओडिशा पवेलियन में स्टॉल नंबर 206 की धनलक्ष्मी के सेल्फ हेल्प ग्रुप में करीब 10 महिलाएं काम करती हैं। इन महिलाओं द्वारा धान की बालियों से मूर्तियां खरीदारों के आकर्षण का केंद्र बनी हैं। इन मूर्तियों को बनाना आसान काम नहीं है, एक धान को धागों से बुना जाता है। उसके बाद कई भगवान की मूर्तियों बनाया जाता है जैसे गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती और जगन्नाथ प्रभु की मूर्तियां बनाती हैं। इन मूर्तियों को बनने में करीब दो से तीन दिन का समय लगता है। इस काम को महिलाएं करीब 10 साल से कर रही हैं। मेले में लगे फूड कोर्ट करीब 30 राज्यों के व्यंजनों के साथ ‘हैप्पी आवर्स का भी लोग भरपूर आनंद ले रहे हैं। खास बात यह है कि रात आठ बजे के बाद कुछ स्टॉल्स पर व्यंजनों की कीमतों में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है, जिससे युवाओं और परिवारों की संख्या और बढ़ गई है। केरल के पार्षदों ने भी मेले का भरपूर आनंद उठाया। सभी पार्षदों ने केरल के स्टॉलों पर विशेष तौर से भ्रमण किया। पार्षदों ने हस्तशिल्प, लोकनृत्य और संगीत कार्यक्रमों की भी सराहना की। शनिवार को शिबानी कश्यप को सुनने के लिए लोगों की भीड़ देखने को मिली।

कोट्स

इस मेले को देखने के लिए विशेष तौर पर दिल्ली से आई हूं। सबसे ज्यादा बिहार पवेलियन पसंद आया। वहीं हर राज्यों के भोजन ने मन को भा लिया है। - अनीता

मेले में परिवार के साथ घूमने के लिए आई हूं। इस एक मेले में भारत की सांस्कृतिक देखने को मौका मिल रहा है। हमने बहुत खरीदारी की है। -डॉ वीणा जैन

मेले में हर बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है जैसे- पीने का पानी, शौचालय और जगह-जगह बैठने की सुविधा भी है। -नंद सिंह
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