कई बिल्डरों ने फर्जी दस्तावेज पर लिया था ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट
गुरुग्राम। हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (हरेरा) अधिनियम से बचने के लिए कई बिल्डरों ने बिना काम पूरा किए ही ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (अधिभोग प्रमाण पत्र) फर्जी दस्तावेज के आधार पर लिया है। हरेरा की जांच में दो बिल्डरों पर मामले की पुष्टि हुई है, जबकि कई बिल्डरों की इस संबंध में जांच की जा रही है। फर्जी दस्तावेज के आधार पर सर्टिफिकेट लेने के मामले में हरेरा ने नोटिस देकर जवाब तलब किया है। अगर फर्जी दस्तावेज के आधार पर ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट लेना साबित हो जाता है तो बिल्डर पर कुल बिल्डिंग लागत का दस फीसदी तक जुर्माना किया जाएगा।
28 जुलाई 2017 को हरेरा अधिनियम लागू करने से पहले हरियाणा सरकार ने ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट लेने वाले बिल्डरों को इस अधिनियम के दायरे से बाहर रखने की बात कही थी। इसी चक्कर में कई बिल्डरों ने फर्जी दस्तावेज और नगर योजनाकार विभाग के कुछ अधिकारियों से मिलीभगत कर ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट ले लिए। ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद आवंटी को फ्लैट दिया जाना चाहिए था, लेकिन काम नहीं होने की वजह से अब तक फ्लैट नहीं मिले हैं। कई आवंटियों ने हरेरा को इसकी शिकायत दी। जिस पर अब इसकी जांच शुरू की गई है।
हरेरा गुरुग्राम के चेयरमैन केके खंडेलवाल का कहना है कि हरियाणा बिल्डिंग कोड के तहत ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट दिया जाता है। सर्टिफिकेट के लिए कई बिल्डर ने आवेदन ही फर्जी दस्तावेज के आधार पर किए।