नींद में सांस रुकने की थी महिला को परेशानी, 1.88 लाख रुपये का रोका था क्लेम
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बीमा पॉलिसी में बीमारी शामिल न होने के नाम पर कंपनी द्वारा रोके गए क्लेम को ब्याज समेत देना होगा। शिकायतकर्ता की पत्नी नींद में सांस रुकने की बीमारी से ग्रसित थी। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सदस्य खुशवींद्र कौर ने दिया है।
दिल्ली, द्वारका के सेक्टर-23 निवासी वेदपाल दलाल ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उनकी पत्नी को बेहोश होने के साथ ही सांस लेने में दिक्कत होती है। वह चिकित्सक के पास गए तो उन्होंने बताया कि वह नींद में सांस रुकने की बीमारी से ग्रसित है। उपचार के लिए उन्होंने अपनी पत्नी को 30 दिसंबर 2020 को अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां पर तीन दिन उपचार में उनका 1.86 लाख रुपये का खर्चा आया था। जब उन्होंने क्लेम के लिए कंपनी में आवेदन किया तो यह कहकर मना कर दिया गया कि वह बीमारी बीमा पॉलिसी में नहीं आती। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि शिकायतकर्ता की पत्नी का ऑपरेशन बैरिएट्रिक सर्जरी के अंतर्गत किया गया है।