गुरुग्राम। विज्ञापन एजेंसियों की लापरवाही की गाज अब भूमि-भवन मालिकों पर गिरेगी। अपनी जमीन और बिल्डिंग पर विज्ञापन चस्पा करने वालों को विज्ञापन फीस अदायगी करनी होगी। नगर निगम विज्ञापन फीस ऐसे जमीन और भवन मालिकों से अदा करने की तैयारी कर रहा है, जिन्होंने एजेंसियों के कहने पर विज्ञापन लगवाए हैं। इसे नगर निगम की दबाव की रणनीति माना जा रहा है।
निगम एक तरह से भूमि और भवन मालिकों के मार्फत डिफाल्टर एजेंसियों पर दबाव बनाना चाहता है, ताकि अपने आप को आर्थिक मार से बचाने के लिए भूमि और भवन मालिक एजेंसियों पर दबाव बना सकें। नगर निगम विज्ञापन फीस को प्रॉपर्टी टैक्स में मर्ज करने की तैयारी कर रहा है। यानी जिन भवनों या जमीन पर विज्ञापन लगे हैं, उनके प्रॉपर्टी टैक्स में ही विज्ञापन फीस जोड़ दी जाएगी। निश्चित ही इससे ऐसे भवन और भूमि मालिकों के प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी होगी। हालांकि निगम प्रॉपर्टी टैक्स बिल बनाते समय विज्ञापन फीस का अलग से उल्लेख करेगा।
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शहर में विज्ञापनों की भरमार
लोगों ने अपनी मर्जी से जमीन और छतों-दीवारों पर विज्ञापन चस्पा करा रखे हैं। बताया जाता है कि नियम के अनुसार अपने निजी भवन या जमीन पर किसी भी कंपनी या प्रतिष्ठान और नेता का विज्ञापन लगाने के लिए निगम में एक तय फीस जमा कराना जरूरी है। इसलिए निगम ने कुछ एजेंसियों से अनुबंध किया। ये एजेंसियां सड़क किनारे जमीन, दुकान-मकान पर विज्ञापन लगाती हैं। उसके बदले एजेंसी कंपनी से मोटी रकम ऐंठती है।
मकान मालिक को कंपनियों द्वारा उसका किराया भी दिया जाता है। इसी के बदले निगम में भी एक तय फीस जमा करानी पड़ती है। निगम की ओर से अपने दायरे में 100 स्थानों को विज्ञापन के लिए चिन्हित किया है, लेकिन शहर में विज्ञापनों की भरमार है।
1000 करोड़ से अधिक का है विज्ञापन घोटाला:
निगम पार्षद सुभाष सिंगला कहते हैं कि नगर निगम में विज्ञापन घोटाला ही सबसे बड़ा है। कई बार निगम सदन की बैठक में इस मुद्दे पर बहस हुई, लेकिन उच्चाधिकारी कुछ सुनने और करने को तैयार नहीं है। इससे साफ होता है कि उच्चाधिकारियों की शह पर ही सारा खेल चल रहा है। कुछ एजेंसियों के साथ अनुबंध किया गया है, उनसे फीस के नाम पर मामूली वसूली की जा रही है। असली रकम अधिकारियों की जेब में जा रही है। निगम में करीब 1000 करोड़ का घोटाला है। शहर में 95 प्रतिशत विज्ञापन भाड़े की भूमि या भवन पर हैं। विज्ञापन लगाने वाली कंपनी जमीन या बिल्डिंग मालिक को किराया देती हैं। सड़कों पर विज्ञापन लगाने के लिए यूनीपोल, बिल्डिंग और शापिंग मॉल में वाल रैप, एलईडी का इस्तेमाल होता है।
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राजस्व बढ़ाने के लिए विज्ञापन फीस वसूली जा रही है। जहां विज्ञापन लगे हैं अब उस जमीन या बिल्डिंग के मालिक से विज्ञापन फीस वसूलने की तैयारी है। इसे प्रापर्टी टैक्स में जोड़कर वसूला जाए, ऐसी तैयारी कर रहे हैं। - अमरदीप सिंह, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम।