कुमार मंगलम डालमिया बनाम मेसर्स चिंटेल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड केस में हरेरा ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरेरा गुरुग्राम ने चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को शिकायतकर्ता कुमार मंगलम डालमिया को हर्जाना देने का निर्देश दिया है। बिल्डर को 10.85 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ पैसे वापस करने होंगे। हरेरा ने शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी के लिए दो लाख और विवाद शुल्क के तौर पर 50 हजार रुपये देने का निर्देश दिया है। पीड़ित ने बिल्डर को एक कोरड़ 35 हजार 750 रुपये से ज्यादा का भुगतान किया था।
कुमार ने हरेरा गुरुग्राम के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर की कोर्ट में एक केस फाइल किया था, जिसमें उन्होंने चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी सेक्टर-109 में अपने फ्लैट की मौजूदा मार्केट वैल्यू पर ब्याज के साथ अपनी मूल रकम का पूरा रिफंड मांगा था। चिंटेल्य पैराडाइसो 10 फरवरी 2022 तब सुर्खियों में आया जब एक टावर में हादसा हो गया था। मंगलम के पास एच टावर में एक फ्लैट था, जिसे उन्होंने एक मूल अलॉटी से खरीदा था। उन्हें साल 2023 में अथॉरिटी में शिकायत फाइल करने तक उक्त यूनिट का पजेशन नहीं दिया गया था। ऑर्डर में कहा गया है कि मंगलम ने कंस्ट्रक्शन लिंक पेमेंट प्लान के तहत कुल बिक्री कीमत एक कोरड़ 35 हजार 750 रुपये से ज्यादा का पेमेंट किया। सोसाइटी के एक टावर में हुई दुखद घटना के बाद प्रॉपर्टी की मौजूदा वैल्यू पर ब्याज के साथ अपना पैसा वापस पाने का फैसला किया।
पीड़ित ने साल 2023 में हरेरा में अपील की और एडजुडिकेटिंग ऑफिसर की कोर्ट ने मेरिट के आधार पर उनके पक्ष में केस का फैसला सुनाया, जिससे अलॉटी और शिकायत करने वाले को बड़ी राहत मिली। ऑर्डर में कहा गया है कि शिकायत करने वाला कमेटी द्वारा तय किए गए एक करोड़ 70 लाख 51 हजार 397 रुपये के रिफंड के तौर पर मुआवजे का हकदार है। पीड़ित को मानसिक परेशानी के लिए दो लाख रुपये और लिटिगेशन कॉस्ट के तौर पर 50 हजार रुपये का मुआवजा भी देने होंगे। ऑर्डर में बिल्डर को निर्देश दिया गया है कि मुआवजे की रकम के साथ-साथ जिलाधीश द्वारा बनाई गई कमेटी द्वारा शिकायत करने वाले के फ्लैट का वेल्यूएशन तय करने की तारीख से लेकर रकम मिलने तक 10.85 प्रतिशत सालाना ब्याज भी दें।
यह है मामला :
10 फरवरी 2022 को चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के डी-टावर में 6 फ्लैट्स की छत गिर गई थी। इस हादसे में दो महिलाओं की जान चली गई थी। जिला प्रशासन से इस सोसाइटी की संरचनात्मक जांच आईआईटी दिल्ली से कराई तो उसमें डी, ई, एफ, जी और एच व जे टावर रहने के लिहाज से असुरक्षित पाए गए थे। बाद में ए, बी, सी टावर अनसेफ मिले और लोगों को खाली करना है। हालांकि तीनों टावर के लोग सुप्रीम कोर्ट गए हुए हैं।