- आईआईटी दिल्ली की जांच में क्लोराइड युक्त पानी से जंग लगाने की बात सामने आई
- डीटीपी प्रवर्तन ने चिंटेल्स इंडिया को पत्र लिखा, 30 दिन में काम शुरू कराने के लिए कहा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसइटी के ए टावर पर भी संकट के बादल दिखाई दे रहे हैं। आईआईटी दिल्ली की जांच के बाद जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) प्रवर्तन ने चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को टावर का संरचनात्मक ऑडिट कराने के लिए कहा है। जांच में टावर के निर्माण में क्लोराइड युक्त पानी के इस्तेमाल से जंग लगने की बात कही है। डीटीपी प्रवर्तन ने यह भी कहा है कि अगर ऑडिट रिपोर्ट सकारात्मक आती है और मरम्मत से काम चल सकता है तो प्रत्येक वर्ष ऑडिट कराना होगा। नकारात्मक रिपोर्ट आने पर टावर डी, ई और एफ की तरह ही इनका भी निस्तारण करना होगा।
डीटीपी ने कहा है कि बिल्डर सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) से ऑडिट का काम करा सकते हैं। साथ ही अगर यह पाया जाता है कि क्लोराइड युक्त पानी के चलते बिल्डिंग लगातार क्षरण का शिकार हो रही है तो प्रत्येक वर्ष जनवरी महीने में इसके ऑडिट का काम कराया जाएगा। जिसकी रिपोर्ट सोसाइटी की रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के साथ-साथ डीटीपी ऑफिस के साथ साझा करनी होगी। डीटीपी ने कहा है कि यहां के रहने वालों के पुनर्वास और हितों की जिम्मेदारी बिल्डर की ही होगी।
नौ में से चार टावर पहले ही असुरक्षित घोषित हो चुकी हैं
गुरुग्राम। चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी में कुल नौ टावर हैं। इनमें से टावर डी हादसा ग्रस्त हो गया था। जांच के बाद इसे असुरक्षित घोषित कर दिया। बाद में टावर ई और एफ को भी रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया। इसके करीब 20 फ्लैट मालिक अब अपना पैसा वापस ले रहे हैं। हाल ही में जी टावर को भी रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया है। चार टावरों के बाद अब पांचवें टावर ए पर भी संशय बन गया है।
20 जून को बिल्डर को पत्र लिखा है। इसके 30 दिन के अंदर संरचनात्मक ऑडिट का काम शुरू करवाना है। निवासियों के हित सबसे पहले हैं। - मनीष यादव, डीटीपी प्रवर्तन
जी टावर खाली करवाने के लिए बिल्डर को नोटिस दिया
गुरुग्राम। रहने के लिए असुरक्षित घोषित किए गए जी टावर को खाली करवाने के लिए डीटीपी प्रवर्तन मनीष यादव ने चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस दिया है। इसमें कहा है कि आईआईटी दिल्ली की रिपोर्ट के मुताबिक टावर का ढांचा जबरदस्त तरीके से जंग का शिकार है। पिछली 12 जून को भी फ्लैट खाली करने के लिए नोटिस दिया गया था कि 15 दिन के अंदर इसे खाली कर दें लेकिन कोई प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली। यहां रह रहे लोगों के जीवन को खतरा है। इसलिए टावर को खाली करवा कर रिपोर्ट जिला उपायुक्त को सौंपे। अगर कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी बिल्डर की होगी।