करवाए जा रहे जान जोखिम में डालने वाले कार्य, रविवार को बाल मजदूरी करते दो बच्चों की हुई थी मौत
दिनेश देशवाल
नूंह। बच्चों को बाल मजदूरी की तरफ धकेलना कितना खतरनाक हो सकता है, इसका उदाहरण शनिवार की रात को नूंह उपमंडल के गांव आटा में उस वक्त देखने को मिला जब शादी में लाइट पकड़ने का काम कर रहे दो बच्चों की करंट लगने से मौत हो गई, जबकि उनके साथ काम कर रहे अन्य नाबालिग बच्चे घायल हो गए। मृतकों में एक बच्चा अपने परिवार में 4 बहनों के साथ अकेला भाई था, जिसके कारण पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मेवात में बच्चों से जान जोखिम में डालने वाले कार्य खुलेआम करवाए जा रहे हैं। इसी के चलते शनिवार को दो बच्चों की मौत हो गई थी।
बच्चों से काम करवाना हमेशा ही जान जोखिम में डालने का काम करता है और इन दिनों मेवात में बाल मजदूरी का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। जो न केवल बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि कानून का उल्लंघन कर बच्चों के अधिकारों का भी सीधा हनन है। बाल मजदूरी के बढ़ते केस इस बात की गवाही दे रहे हैं कि शिक्षा के स्थान पर स्थानीय लोग बच्चों को काम सिखाने की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। जनवरी व फरवरी माह में बाल कल्याण समिति नूंह के समक्ष बाल मजदूरी के 21 केस पंजीकृत हुए हैं।
मेवात देश के आकांक्षी जिलों में शामिल है। यहां के पिछड़ेपन को आंकने के लिए जो मापदंड तय किए गए थे, उनमें शिक्षा एक प्रमुख मापदंड है। लेकिन दूसरी तरफ शिक्षकों की कमी, शिक्षा के प्रति लोगों की उदासीनता, सुविधाओं व संसाधनों की कमी के कारण लगातार प्रयास के बाद भी शिक्षा का स्तर नहीं सुधर पा रहा है। इसके कारण स्थानीय लोगों का मानना है कि बच्चे स्कूलों में पढ़ते नहीं हैं बल्कि इधर-उधर टाइम पास करते हैं और कई बुरी आदतों में संलिप्त हो जाते हैं। इससे बेहतर है कि वे बच्चों को कोई काम सिखाएं ताकि भविष्य में उनके बच्चे अच्छे कारीगर व मैकेनिक बन सकें और अपनी दुकान खोलकर आसानी से अपना जीवन यापन कर सकें।
एक वर्ष में 71 बच्चे किए रेस्क्यू : जिले में बाल मजदूरी रोकने के लिए बाल कल्याण समिति के नेतृत्व में समय-समय पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जाते हैं। जिसमें हरियाणा पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट व शक्ति वाहिनी एनजीओ द्वारा बच्चों को रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाता है। जहां पर बच्चों व परिजनों की काउंसलिंग कर बाल मजदूरी न करने व बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है। पिछले एक वर्ष में जिला नूंह के फिरोजपुर झिरका, तावडू, नूंह व पुन्हाना में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 71 बच्चों को बाल मजदूरी करते हुए रेस्क्यू किया गया।
खतरनाक श्रेणी की मजदूरी करते किए रेस्क्यू : ईंट भट्ठों, ढाबों पर तंदूर में रोटी लगाते हुए, वेल्डिंग की दुकानों पर वेल्डिंग करते हुए, कार, बाइक, ट्रैक्टर आदि ठीक करने के कार्यों में संलिप्त बच्चों को रेस्क्यू कर परिवार में छोड़ा गया और परिवार को प्रतिबंधित किया गया कि वे बच्चों से मजदूरी न करवाएं।
सरकार पैदा करे रोजगार के अवसर : नूंह बार के पूर्व प्रधान ताहिर हुसैन रूपडिया ने कहा कि स्कूलों में शिक्षा के लिए पर्याप्त शिक्षक व संसाधन उपलब्ध कराए जाएं व सरकार नूंह जिला में रोजगार के अवसर बढ़ाए, जिससे लोगों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और बाल मजदूरी जैसे अपराध कम हो सकेंगे।
जिले में बाल मजदूरी रोकने के लिए नियमित रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जाएंगे और बाल मजदूरी कराने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा। - बाल संरक्षण अधिकारी आबिद हुसैन