-सड़क से विधानसभा तक उठाया गया मुद्दा, फिर भी स्थिति जस की तस
शेरसिंह डागर
नूंह। नूंह मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं की भरमार है। अस्पताल में दवाइयों का अभाव है। मरीजों को दवाइयों के लिए निजी मेडिकल स्टोर जाना पड़ता है। जगह-जगह छत की सिलिंग टूटी हुई है। मेवात की करीब 15 लाख की आबादी के स्वास्थ्य की देखरेख के लिए 550 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए मेडिकल कॉलेज को लेकर सरकार उदासीन है। इसकी अव्यवस्थाओं का मामला सड़क से विधानसभा तक उठा है, लेकिन स्थिति जस की तस रही।
शाम होते ही कुछ डाक्टर गुरुग्राम चले जाते हैं तो यहां हालात और बदतर हो जाते हैं। अधिकांश सीनियर डॉक्टर ओपीडी व आपातकालीन सेवाओं से नदारत रहते हैं। कॉलेज के रखरखाव पर भी अधिकारियों को ध्यान नहीं है। लिफ्ट खराब होने से कई बार मरीज फंस चुके हैं।
बाहर से खरीदनी पड़ती हैं दवाइयां
सरकार मरीजों को मुफ्त दवाई देने का दावा करती है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में दवाइयों का अभाव है। हालात ये हैं कि अधिकांश दवाइयां लोगों को बाहर से खरीदनी पड़ती है। यहां सैंपल कलेक्शन के लिए बाहर से सामान मंगानी पड़ रही है। लोगों का आरोप है कि सीनियर डॉक्टर ओपीडी व आपातकाल सेवा में बहुत कम बैठते हैं। जिसके कारण सारे काम की जिम्मेदारी जूनियर डॉक्टर व स्टाफ नर्स पर होती है। डॉक्टर के नियमित न बैठने से मेडिकल कॉलेज इलाज कम रेफर ज्यादा किया जाता है।