गुरुग्राम। राष्ट्रीय दृष्टिहीनता नियंत्रण योजना के तहत सोमवार को मोतियाबिंद मुक्त गुरुग्राम कार्यक्रम की शुरुआत की गई। मंडलायुक्त राजीव रंजन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र यादव ने सीएमओ कार्यालय से हरी झंडी दिखाकर चल चिकित्सालय वाहन को रवाना किया। इसके जरिए गांव-गांव में नेत्र विकार से ग्रस्त मरीजों की जांच की जाएगी और उनको उचित इलाज दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग गुरुग्राम ने राष्ट्रीय दृष्टिहीनता नियंत्रण योजना के तहत चलाए जाने वाले मोतियाबिंद जांच कार्यक्रम की करीब दो साल बाद फिर से शुरुआत की है।
पिछले वर्ष कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए नागरिक अस्पताल सेक्टर-10, पटौदी व सेक्टर 31 पॉलीक्लीनक को छोड़कर अन्य सभी जगह पर आई ओपीडी को बंद कर दिया गया था। मंडलायुक्त राजीव रंजन ने चल चिकित्सालय वाहनों को रवाना करने के बाद कहा कि शरीर में किसी भी रोग की समय रहते जांच हो जाए तो उसका उचित उपचार संभव है। आंखें मानव शरीर का प्रमुख अंग हैं इसके बिना सामान्य जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती इसलिए आंखों को सही देखरेख के साथ ही समय- समय पर इनकी उचित जांच भी आवश्यक है।
सीएचसी व पीएचसी पर चलेगी ओपीडी
सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा कि जांच कार्यक्रम के तहत जिले के सभी सीएचसी व पीएचसी पर प्रत्येक माह एक या दो बार आई ओपीडी का आयोजन किया जाएगा। जांच कार्यक्रम की अन्य जानकारी देते हुए उप सिविल सर्जन डॉ. ईशा नारंग ने बताया कि मिशन के सफल क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग विभिन्न एनजीओ के सहयोग से जिले के प्रत्येक गांव में मोतियाबिंद जांच शिविर का आयोजन करेगा। डॉ. ईशा ने बताया कि जांच शिविरों में बुजुर्गों को चश्मे का मुफ्त वितरण, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी, केराटोप्लास्टी, विट्रोरेटिनल सर्जरी और बचपन से अंधापन से पीड़ित नागरिकों की जांच व उसके बाद जरूरत पड़ने पर निशुल्क सर्जरी भी की जाएगी।