सोनीपत के ककरोई से होकर गुरुग्राम तक नहर को पाइप लाइन में तब्दील करने की योजना
2 हजार करोड़ रुपये की है परियोजना
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सिंचाई विभाग ने गुरुग्राम वाटर सप्लाई चैनल (जीडब्ल्यूएस) को पाइप लाइन में बदलने की दो हजार करोड़ रुपये की परियोजना प्रदेश सरकार को मंजूरी के लिए भेजी है। इस परियोजना का उद्देश्य गुरुग्राम में नहरी पेयजल की उपलब्धता को बेहतर बनाना है। मंजूरी मिलने के बाद सिंचाई विभाग इसके निर्माण के लिए निविदा जारी करेगा।
प्रदेश सरकार गुरुग्राम में नहरी पेयजल उपलब्धता को बेहतर करने पर जोर रही है। सोनीपत के ककरोई से होकर गुरुग्राम तक नहर को पाइप लाइन में तब्दील कराने की योजना है। साल 1990 में बनी गुरुग्राम नहर जर्जर हालत में है और कम पानी की सप्लाई करनी पड़ती है। बसई स्थित जल शोधन संयंत्र में यमुना नहर से 69 किलोमीटर से पानी लाया जाता है। गर्मियों में संयंत्र में पानी की कमी हो जाती है और एनसीआर चैनल से लाना पड़ता है। दूसरा गुरुग्राम कैनाल भविष्य में पानी की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में जीडब्ल्यूएस को री-मॉडलिंग करने की तैयारी है। पहले जीडब्ल्यूएस को 175 क्यूसेक पानी के लिए डिजाइन किया था। अब री मॉडलिंग कर 686 क्यूसेक तक करने की योजना है।
सिंचाई विभाग के अनुसार, परियोजना को साल 2050 में पानी की मांग को देखते हुए तैयार किया गया है। इससे जीएमडीए, पब्लिक हेल्थ, एचएसआईआईडीसी और एचएसवीपी और समेत अन्य विभागों को पानी उपलब्ध कराया जाएगा। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता रविंद्र कुमार ने बताया कि नहर को पाइप लाइन में तब्दील किया जाना है। डीपीआर की मंजूरी के बाद टेंडर जारी किया जाएगा।
आने वाले दिनों में पेयजल की मांग और बढ़ेगी
गुरुग्राम का तेजी से विकास हो रहा है। प्रदेश सरकार ग्लोबल सिटी विकसित करने पर काम कर रही है। इसके अलावा गुरुग्राम का विकास मानेसर तक हो गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेयजल की मांग और बढ़ेगी। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जीएमडीए शहर में पानी सप्लाई को लेकर कदम उठा रहा है। चंदू बुढ़ेरा और बसई संयंत्र में 100-100 एमएलडी के दो संयंत्र का निर्माण होना है। हालांकि इसका निर्माण खर्च संबंधित विभागों के पानी के प्रयोग के आधार पर लिया जाना है। पब्लिक हेल्थ का करीब 925 करोड़ का शेयर होगा जबकि, जीएमडीए का करीब 700, एचएसआईआईडीसी का करीब 180 करोड़, एचएसवीपी का करीब 150 करोड़ और टूरिज्म विभाग का करीब 19 करोड़ का शेयर होगा।