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Gurugram News: बीपीटीपी लिमिटेड पर 4.84 करोड़ का जुर्माना

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आरबीआई ने फेमा के नियमों के उल्लंघन करने पर की कार्रवाई
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बीपीटीपी लिमिटेड और उसके निदेशकों पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाया है। यह आदेश 17 सितंबर 2026 को जारी किया गया, जिसमें कुल 4.84 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान शामिल है। कंपनी और उसके निदेशकों ने विदेशी निवेशकों को शेयरों के आवंटन में नियमों का उल्लंघन किया था, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच समाप्त हो गई है।

प्रवर्तन निदेशालय ने जानकारी के आधार पर फेमा प्रावधानों के तहत जांच शुरू की थी। जांच पूरी होने के बाद, ईडी ने न्यायनिर्णायक प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज की। शिकायत में फेमा 20/2000-आरबी के विनियमन 5(1) का उल्लंघन बताया गया था। इसमें विदेशी निवेशकों को वैकल्पिक खंड के साथ शेयर जारी करना शामिल था, जिसमें सुनिश्चित प्रतिफल या निकास मूल्य का आश्वासन दिया गया था। इस उल्लंघन में शामिल राशि 5,37,50,00,000 रुपये थी। बाद में, कंपनी और उसके निदेशकों ने आरबीआई के समक्ष उल्लंघन के शमन के लिए आवेदन किया। आरबीआई के संदर्भ पर, ईडी ने शमन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किया। इसके बाद, आरबीआई ने 17 सितंबर 2026 को शमन आदेश जारी किया। बीपीटीपी लिमिटेड को 4,03,62,500 रुपये का भुगतान करना होगा। निदेशकों सुधांशु त्रिपाठी और काबुल चावला को प्रत्येक को 40,36,250 रुपये का भुगतान करना होगा।
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फेमा शमन प्रक्रिया
फेमा मुख्य रूप से एक नागरिक कानून है। इसकी धारा-15 उल्लंघन के शमन का प्रावधान करती है। यह स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देता है और अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करता है। इससे मामलों का त्वरित निपटान सुनिश्चित होता है। शमन की प्रक्रिया विदेशी मुद्रा (शमन कार्रवाई) नियम, 2024 के तहत निर्धारित है। प्रवर्तन निदेशालय नीति के तौर पर उन उल्लंघनों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करता है जो शमन के योग्य होते हैं। फेमा की धारा 15(2) के अनुसार, शमन राशि का भुगतान करने पर आगे कोई कार्रवाई शुरू नहीं की जाती है।
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सार्वजनिक सूचना और पारदर्शिता
आरबीआई विदेशी मुद्रा (शमन कार्रवाई) नियम, 2024 के नियम तीन के तहत सक्षम प्राधिकारी है। आरबीआई ने फेमा के तहत उल्लंघनों के शमन के लिए मास्टर दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश उल्लंघन की प्रकृति, गंभीरता और राशि के आधार पर शमन राशि निर्धारित करते हैं। ईडी उन प्रमुख मामलों को प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से सार्वजनिक करता है जहां जांच बंद कर दी गई है। इसका उद्देश्य समान लंबित जांच वाले अन्य लोगों को आरबीआई के समक्ष शमन आवेदन दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
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