फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मान का विवादित वीडियो: गुमनाम लैब में बनवाई गई वायरल Video की फर्जी रिपोर्ट, 15 जून को हुआ व्हाट्सएप पर संपर्क

Wed, 24 Jun 2026 04:13 PM IST
Sharukh Khan सोनू यादव, अमर उजाला, गुरुग्राम

सार

पंजाब के सीएम की कथित विवादित वायरल वीडियो का मामले में खुलासा हुआ है। कथित विवादित वायरल वीडियो को एडिटिड बताने के लिए 2 फर्जी रिपोर्ट बनवाई गई थी। दिल्ली व हरियाणा सरकार के कार्यालयों में कांट्रेक्ट पर भर्ती कर्मियों ने रिपोर्ट बनवाई थी।
विज्ञापन
bhagwant mann viral video - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब के सीएम की कथित विवादित वायरल वीडियो को एडिटिड बताने के लिए 2 फर्जी रिपोर्ट बनवाई गई थी। दोनों रिपोर्ट दिल्ली व हरियाणा सरकार के कार्यालयों में कांट्रेक्ट पर भर्ती अंकित व अरुण ने बनाई थी। मामले में ये भी पता चला है कि साइबर यान और सिफर सेंटिनल लैब के नाम पर ये दोनों रिपोर्ट बनाई गई हैं। 
विज्ञापन


हैरत की बात यह है कि दोनों ही लैब का जमीन पर कोई अस्तित्व पुलिस की जांच में नहीं होना बताया गया है। शुरुआती जांच में यह भी पता चला कि अरुण ने जिस साइबर यान लैब के नाम पर फर्जी रिपोर्ट बनाई, वह इसका कर्मचारी ही नहीं है। साथ ही अंकित ने जिस सिफर सेंटिनल लैब के नाम पर रिपोर्ट बनाई, ये उसमें कर्मचारी नहीं है और यह लैब भी किसी सरकारी विभाग से रजिस्टर्ड नहीं है।

 

शिकायतकर्ता ने 50 हजार में बनवाई रिपोर्ट, 10 लाख लेकर अपने 2 खातों में जमा कराए
एफआईआर में शिकायतकर्ता बने सिरसा के गोविंद नगर निवासी जसप्रीत सिंह ने ही इस पूरे फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट प्रकरण में अहम भूमिका निभाई। पंजाब सरकार के कथित अधिकारियों ने जब उससे संपर्क किया तो उसने ही आगे अंकित व अरुण से संपर्क किया। वो ही दिल्ली में जाकर रिपोर्ट बनवाने के लिए आरोपियों से मिला।

जसप्रीत ने अंकित को कुल 50 हजार रुपये इस काम के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर किए थे। खुद को मिले 10 लाख रुपयों में से 2.50 लाख रुपये जसप्रीत ने अपने एसबीआई बैंक सिरसा में और 7.50 लाख रुपये आईसीआईसीआई बैंक सिरसा के खाते में जमा कराए।
 

15 जून को हुआ था व्हाट्सएप पर संपर्क, फिर सिरसा से गुरुग्राम आया था जसप्रीत
शिकायतकर्ता जसप्रीत से पंजाब सरकार के कथित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने 15 जून को व्हाट्सएप कॉल पर संपर्क किया था। इसमें वायरल वीडियो को लेकर रिपोर्ट बनवाने को कहा गया। फिर जसप्रीत ने अपने परिचित साइबर एक्सपर्ट अरुण महेंद्र से कॉल पर बात की और उसके हामी भरने पर वीडियो की पेनड्राइव मांगी। ये पेनड्राइव सीधे अरुण के पास ही डिलीवर कराई गई। रिपोर्ट 1 दिन के अंदर बनवाने को कहा गया। बाद में जसप्रीत को कॉल कर गुरुग्राम मिलने बुलाया गया। 

 

शाम 6 बजे गाड़ी से जसप्रीत निकला और रात 11 बजे गुरुग्राम के क्राउन प्लाजा होटल पहुंचा। यहां 2 रिपोर्ट बनवाने को कहा गया और उसमें लिखना होगा कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति पंजाब का मुख्यमंत्री नहीं है। जसप्रीत ने दिल्ली में कार्यरत अपने साथी पंकज यादव से बात की तो उसने मिलने दिल्ली बुलाया। जसप्रीत यहां से सेक्टर-46 के गेट हाउस गया तो 16 जून को उसे फिर से क्राउन प्लाजा होटल बुलाकर एक वरिष्ठ अधिकारी से मिलवाया गया। 

16 जून को ही दोनों रिपोर्ट मांगी गई और फिर बाहर खड़ी इनोवा कार के पास ले जाकर 10 लाख रुपये जसप्रीत को दिए गए। रुपये बैग में डालकर जसप्रीत दिल्ली में पंकज यादव से मिलने तिलक नगर स्थित साइबर यान के ऑफिस गया। पंकज ने अंकित से संपर्क कराया तो अंकित ने दिल्ली के जेएलएन मेट्रो स्टेशन के पास बुलाया। फिर पंजाब सरकार के अधिकारी को भी वहां बुलाया और अंकित से मुलाकात कराई।

 

दोनों रिपोर्ट व्हाट्सएप पर मंगवाकर बार-बार करेक्शन कराई गई
जसप्रीत ने अरुण व अंकित दोनों से जल्दी रिपोर्ट की सॉफ्ट कॉपी लेकर पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारी को भेजी। वरिष्ठ अधिकारी ने दोनों रिपोर्ट में अपने हिसाब से बार-बार करेक्शन कराई और इसके बाद अपने हिसाब से दोनों रिपोर्ट को फाइनल किया। 

 
विज्ञापन

जसप्रीत के अनुसार उन्होंने पंजाब सरकार के अधिकारियों को बताया कि जिन लैब्स के नाम से यह रिपोर्ट तैयार होगी, उनमें से कोई भी लैब फिल्ड पर एग्जिस्ट नहीं करती। अंकित व अरुण भी कोई सर्टिफाईड लैब नहीं चलाते। पंजाब सरकार के अधिकारियों ने कहा कि कोई दिक्कत नहीं है, हमें इस बारे में पता है। जसप्रीत के अनुसार बात में उसे पता चला कि दोनों ही लैब फोरेंसिक लैब नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें