स्टेशनरी और प्रिंटआउट पर खर्च से विद्यार्थियों का बजट बिगड़ रहा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। कॉलेज में दाखिला लेने के बाद विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों का खर्च बढ़ जाता है। फीस जमा करने के बाद किताबें, कॉपियां, स्टेशनरी और पढ़ाई से जुड़ा अन्य सामान खरीदने पर भी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा रोजाना कॉलेज आने-जाने के लिए बस, मेट्रो और ऑटो का किराया भी देना पड़ता है। ऐसे में परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च संभालना चुनौती बन रहा है।
कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हर महीने किताबों, नोट्स, प्रिंटआउट और प्रोजेक्ट के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं। वहीं, घर से दूर कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों का आने-जाने का खर्च भी अधिक हो जाता है। इन सभी खर्चों का असर विद्यार्थियों के मासिक बजट पर पड़ रहा है।
बढ़ते खर्च को देखते हुए अभिभावक बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग से बजट बना रहे हैं। उन्हें फीस के साथ किताबों, स्टेशनरी और आने-जाने के खर्च का भी ध्यान रखना पड़ रहा है। ऐसे में परिवारों के लिए घर के बाकी खर्चों के साथ बच्चों की शिक्षा का खर्च संभालना जरूरी हो गया है।
वर्जन
कॉलेज की फीस के अलावा किताबें, स्टेशनरी और नोट्स पर भी काफी खर्च हो जाता है। कई बार पढ़ाई के लिए जरूरी किताबें और अन्य सामग्री खरीदनी पड़ती है। इससे हर महीने का बजट बढ़ जाता है। - सचिन
आने-जाने में भी रोजाना पैसे खर्च होते हैं। बस और मेट्रो से सफर करने के बाद भी कई बार ऑटो लेना पड़ता है। ऐसे में परिवहन और पढ़ाई का खर्च मिलाकर महीने का बजट संभालना मुश्किल हो जाता है। -निखिल