आसान नहीं दिख रहा कचरे का पहाड़ हटाना, आसपास के गांवों में लगाए जा रहे स्वास्थ्य जांच शिविर, पानी के भरे जा रहे नमूने
संजय शिशौदिया
गुरुग्राम। दो जिलों के कचरे से अरावली के बंधवाड़ी में बना कूड़े का पहाड़ अब तक 377 करोड़ से ज्यादा की धनराशि पी चुका है। इसके बावजूद यह पहाड़ आज भी सीना तानकर खड़ा हुआ है। हालत यह है कि बंधवाड़ी लैंडफिल के आसपास के गांवों की जमीन का पानी भी लोगों को बीमार कर रहा है। पर्यावरणविदों की माने तो लैंडफिल से निकली लीचेट के कारण जहां अरावली के पेड़ पौधे खराब हो रहे हैं, वहीं जंगली जानवरों की भी मौत हो रही है। कूड़े का यह पहाड़ अरावली तंत्र को प्रभावित कर रहा है।
बंधवाड़ी में कूड़े के इस पहाड़ को लेकर एनजीटी भी सख्त है। इस मामले में एनजीटी हरियाणा सरकार पर 100 करोड़ का जुर्माना भी लगा चुकी है। बीते कुछ साल के दौरान ही तीन बार गुरुग्राम और फरीदाबाद के प्रशासनिक अधिकारी एनजीटी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश हो चुके हैं। इसके बाजवूद बंधवाड़ी में कूड़े के पहाड़ को लेकर कोई गंभीर नहीं दिख रहा। 22 फरवरी को भी इस मामले में एनजीटी में सुनवाई होनी है।
ईकोग्रीन को दे रखी है जिम्मेदारी
फरीदाबाद और गुरुग्राम में कचरा निपटान का काम ईकोग्रीन कंपनी को दे रखा है। इसके लिए 2016 में राज्य सरकार और ईको ग्रीन कंपनी के बीच करार हुआ था। इसी करार के तहत ईको ग्रीन को बंधवाड़ी डंपिंग ग्राउंड के पास कचरे से बिजली बनाने का संयंत्र भी लगाना था। आज तक यहां संयंत्र शुरू नहीं हो पाया है। अधिकारियों की माने तो कचरा निस्तारण के लिए अब तक ईकोग्रीन को 377 करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है।
दो जिलों से प्रतिदिन निकलता है करीब 2000 मीट्रिक टन कचरा
बंधवाड़ी के पहाड़ तक दो जिलों गुरुग्राम और फरीदाबाद से प्रतिदिन करीब 2000 मीट्रिक टन कचरा पहुंचता है। यही कारण है कि आज यहां करीब 30 लाख मीट्रिक टन कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया है। याचिका के आधार पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दोनों शहरों के नगर निगमों के आयुक्तों को बंधवाड़ी का कूड़ा हटाकर वहां केमिकल ट्रीटमेंट के बाद एक बायोडायवर्सिटी पार्क स्थापित करने के निर्देश भी दे रखे हैं।
बीमार हो रहे लोग
बंधवाड़ी में इस कूड़े के पहाड़ के कारण आसपास के गांवों पाली, मोहबताबाद ,अनखीर, भाखड़ी नवादा, नंगला, अनंगपुर, मांगर, डबुआ, बाजरी, नेकपुर, नया गांव, पाखल, खेड़ी, धौज आदि के लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। इन गांवों में लोग बीमार हो रहे हैं। बीते तीन चार साल के दौरान ही आसपास के गांवों में 17 से अधिक लोग कैंसर से जान गंवा चुके हैं, जबकि 11 लोग अभी इससे पीड़ित हैं।
क्या कहते हैं पर्यावरणविद
पर्यावरणविद वैशाली राणा चंद्रा ने कहा कि बिना सोचे समझे अरावली पर्वत शृंखला में यह प्लांट लगाया गया है। यह रिचार्ज जोन था। बरसात का पानी इकट्ठा होता था। अब इस प्लांट से आसपास लगते गांवों का पानी प्रदूषित हो चुका है। कूड़े का पहाड़ खड़ा है। कचरे को ट्रीट करने के पर्याप्त उपाय नहीं किए जा रहे हैं। इस कारण एनजीटी में याचिका दायर की। एनजीटी ने 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया, जो कि नाकाफी है। अर्बन लोकल बॉडी और नगर निगम के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इनके खिलाफ पर्यावरण को पहुंचें नुकसान के तहत कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच के साथ ही पानी का सैंपल भी लिया
गुरुग्राम। नगर निगम द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से बंधवाड़ी व आसपास के गांवों में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। शिविरों में ग्रामीण स्वास्थ्य की जांच कराने पहुंच रहे हैं। सोमवार को गांव बंधवाड़ी में आयोजित किए गए स्वास्थ्य जांच शिविर में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच के साथ ही गांव से पानी का सैंपल भी टीम द्वारा लिया गया।
नगर निगम गुरुग्राम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. आशीष सिंगला ने बताया कि स्वास्थ्य जांच शिविर में 36 जांच हीमोग्लोबिन, तीन जांच एचआईवी, तीन जांच हेपेटाइटिस बी, 40 एनसीडी स्क्रीनिंग, 100 एनसीडी एनरोलमेंट और 10 जांच टीबी संबंधी की गई हैं। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व 25 जनवरी को गांव बालियावास में आयोजित किए गए स्वास्थ्य जांच शिविर में 104 हीमोग्लोबिन, आठ एचआईवी, आठ हेपेटाइटिस बी, 107 एनसीडी स्क्रीनिंग और 20 टीबी स्क्रीनिंग की गई थी। 24 जनवरी को गांव ग्वाल पहाड़ी में आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर में 60 हीमोग्लोबिन जांच, 30 एचआईवी जांच, 30 हेपेटाइटिस बी जांच, 40 एनसीडी और 20 टीबी जांच हुई थी। टीम द्वारा दोनों गांवों से भी पानी के सैंपल लिए गए थे।