बदले चेहरे के साथ पैदा हुआ बच्चा दुर्लभ बीमारी का शिकार
- एपर्ट नाम की बीमारी से पीड़ित बच्चे की दोनों आंखों के बीच काफी अंतर
- सही अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में जन्म से पहले लग सकता था बीमारी का पता
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। एक निजी अस्पताल में नौ माह के बच्चे की खोपड़ी की सर्जरी कर दोबारा आकार दिया गया है। जांच में पता चला कि बच्चा एपर्ट नाम की लाइलाज दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है। इस कारण जन्म के समय उसकी दोनों आंख के बीच काफी ज्यादा अंतर बढ़ गया। खोपड़ी सामान्य से छोटी ही विकसित हुई। दोनों हाथों की अंगुलियां आपस में जुड़ी हुई निकली। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भवती महिला का पहला अल्ट्रासाउंड सही से समझकर शिशु विकार की जानकारी मिल जाती, हालांकि एक छोटी सी लापरवाही से बच्चे को दुर्लभ बीमारी से जूझना पड़ रहा है।
एपर्ट बीमारी के कारण बच्चे के मस्तिष्क का सही विकास नहीं हो पा रहा। ऐसे में नौ माह की उम्र में उसकी खोपड़ी को सर्जरी के जरिए दोबारा आकार दिया गया है। इससे मस्तिष्क विकास के लिए खोपड़ी में ज्यादा जगह मिलेगी। अगले माह उसकी उंगलियों को ऑपरेशन के जरिए अलग किया जाएगा। इसके बाद भी बच्चे को सामान्य विकास के लिए कम से कम छह से सात सर्जरी से गुजरना होगा। भविष्य में जीवनशैली सही रहने पर वह जनसामान्य की तरह जी सकेगा। हालांकि हृदय और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं उसे परेशान करती रहेगी।
अस्पताल के न्यूरो और स्पाइन सर्जरी निदेशक डॉ. सुमित सिन्हा ने बताया कि 18 विशेषज्ञों ने मिलकर बच्चे की पहली सर्जरी की। इसमें एब्जॉर्बर पॉलीमर प्लेटों की मदद से खोपड़ी को फिर से तैयार कर आकार दिया गया। पांच वर्ष की उम्र में बच्चे को प्लास्टिक सर्जरी के जरिए चेहरे को नया आकार देने की जरूरत होगी। इसके अलावा करीब पांच से छह सर्जरी होगी। बच्चे के पिता मोहम्मद शौकत ने बताया कि गर्भावस्था में पत्नी की सभी जांच कराई। हालांकि किसी विशेषज्ञ ने रिपोर्ट के दौरान बच्चे के शारीरिक विकास में कोई कमी नहीं बताई। ऐसे में बच्चे के जन्म के बाद ही उन्हें बच्चे के दुर्लभ बीमारी से पीड़ित होने की जानकारी मिली। वह केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में कार्यरत हैं।