पटौदी का मामला, पुनर्वास योजना के तहत आवंटित की गई थी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। पटौदी में फर्जी दस्तावेज बनाकर पैतृक जमीन हड़पने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई पटौदी की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत के आदेश हुई। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उनके मृत दादा के नाम पर फर्जी आधार और पैन कार्ड बनवाए और फिर उनकी पैतृक संपत्ति हड़पे की कोशिश की।
शिकायतकर्ता भूपेन्द्र शर्मा, राज कुमार शर्मा और आरती मेहता ने बताया कि उनके परदादा बोधराज को भारत सरकार की पुनर्वास योजना के तहत चार कनाल चौदह मरले की जमीन आवंटित हुई थी, जो उनके दादा चमनलाल उर्फ चमन राम के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। चमनलाल का निधन 15 दिसंबर 1970 को हो चुका है। आरोप है कि प्रवीण पत्नी नूर हसन, नूर हसन पुत्र अब्दुल हकीम, मामन सिंह नम्बरदार और शकील पुत्र अब्दुल हकीम ने इसे हड़पने की कोशिश की।
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फर्जी दस्तावेज का खेल
शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपियों ने चमनलाल के नाम पर फर्जी आधार और पैन कार्ड तैयार किए। इसके बाद 22 जनवरी 2025 को प्रवीण के नाम पर एक फर्जी वसीयत पंजीकृत कराई। 25 फरवरी 2025 को नूर हसन के नाम पर एक हस्तांतरण विलेख भी पंजीकृत किया गया। मामन सिंह नम्बरदार दोनों वसीयतों में गवाह बने। शिकायतकर्ताओं ने इस मामले में 27 मई 2025 को उच्च अधिकारियों को शिकायत दी थी। हालांकि, उस समय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने पटौदी की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में याचिका दायर की। अदालत ने 9 सितंबर 2026 को मामला दर्ज करने का आदेश दिया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2), 318(4), 319(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि टीम मामले की गहनता से जांच कर रही है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।