अदालत ने वारंट की तामील कराने के लिए कहा, 21 अक्तूबर को होगी सुनवाई
नंबर गेम - 70.28 लाख प्रति एकड़ है मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अधिग्रहित जमीन का मुआवजा न देने पर जिला अदालत ने जमीन अधिग्रहण अधिकारी और एचएसवीपी प्रशासक को गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत ने यह आदेश दिया है। विभाग ने करीब एक साल से मुआवजा नहीं दिया है। इसके साथ ही अदालत ने गिरफ्तारी वारंट की तामील कराने के लिए कहा है।
एचएसवीपी ने 2003 में इस्मालपुर गांव में जमीन का अधिग्रहण किया था। 2006 में प्रति एकड़ 15 लाख रुपये का मुआवजा तय हुआ था। 2014 में अदालत ने मुआवजे को बढ़ाकर 65.04 लाख रुपये प्रति एकड़ कर दिया। इसके बाद जमीन मालिकों ने पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने 2025 में मुआवजा 70.28 लाख रुपये प्रति एकड़ कर दिया। लगातार आदेशों के बावजूद विभाग ने मुआवजे की राशि अदालत में जमा नहीं कराई। इस पर अदालत ने अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए।
फाइल को विभागों के बीच शटल कॉक की तरह घुमाया : अदालत
11 अगस्त को हुई सुनवाई में अदालत ने अधिकारियों के रवैये पर टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने फाइल को विभागों के बीच शटल कॉक की तरह घुमाया है। अंतिम निर्णय तक फाइल को रोका नहीं जाना चाहिए और अंतरिम भुगतान जारी रहना चाहिए। कल्याणकारी राज्य में भूमि अधिग्रहण में समय पर मुआवजा देना सर्वोच्च प्राथमिकता है। एचएसवीपी प्रशासक और भू-अर्जन अधिकारी बैठक कर भुगतान के लिए तालमेल बिठाएंगे।