अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने से जुड़े मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने से जुड़े मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। इस मामले को लेकर पर्यावरणविदों और विभिन्न पक्षों की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। अदालत ने पहले ही सभी पक्षकारों से अरावली की परिभाषा, उसके भौगोलिक विस्तार और संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपने-अपने लिखित सुझाव और तर्क प्रस्तुत करने को कहा था।
अरावली से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जा सकती है, ताकि भविष्य में संरक्षण से जुड़े ठोस निर्णय लिए जा सकें। पर्यावरणविद नीलिमा ने बताया कि कमेटी गठित करने के लिए कुछ नाम सुझाव के तौर पर भेजे हैं। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का इंतजार क्या फैसला आता है। उस हिसाब से हम लोग आग की नीति तैयार करेंगे।
पिछली सुनवाई 26 फरवरी को हुई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को दस दिन के भीतर अपने सुझाव और नोट दाखिल करने के निर्देश दिए थे। इस मामले में केंद्र सरकार से भी विस्तृत पक्ष रखने को कहा गया है। साथ ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय से अरावली की पहचान, उसका कुल विस्तार, ढलान, पहाड़ी टीले, वन क्षेत्र और पूरे इकोसिस्टम के संरक्षण से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि पहाड़ों को 20 या 100 मीटर की ऊंचाई के आधार पर परिभाषित नहीं किया जा सकता। केवल नाप-तोल के पैमाने पर उन्हें खनन के लिए खोलना गलत है, क्योंकि पहाड़ एक जटिल प्राकृतिक और पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा हैं। -
राजू रावत, पर्यावरणविद
बीते कई वर्षों में अरावली में बड़े पैमाने पर खनन हो चुका है। अब ऊंचाई या नाप-तोल के आधार पर क्षेत्रों को चिन्हित कर खनन की अनुमति देना भी प्रकृति के साथ छेड़छाड़ माना जा रहा है और इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है।-
मनिंदर सिंह, पर्यावरणविद