गुरुग्राम समेत अन्य इस क्षेत्र के जिले जो अब तक इन फलों की खेती के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते थे। अब इन चुनिंदा किस्मों एवं कृषि प्रोद्यौगिकी के माध्यम से इन फसलों की उपज पाने का प्रयास किया जाएगा। गुरुग्राम क्षेत्र में परंपरागत फसलें जैसे गेहूं, सरसों एवं बाजरे की प्रमुख रूप से खेती की जाती है।
आधुनिक युग में कृषि के विविधीकरण के तहत सेब, नाशपाती, आड़ू और आलू बुखारा जैसे लाभदायक फलों की खेती एसजीटी विश्वविद्यालय के अनुसंधान पर आधारित सराहनीय कदम है। सम शीतोष्ण (लो चिलिंग) किस्मों का चयन इस परियोजना की सफलता में अहम भूमिका निभा सकता है।
गुरुग्राम की जलवायु इन किस्मों की उपज के प्राकृतिक रूप से पूरी तरह अनुकूल नहीं है। कृषि संकाय की अध्यक्ष डॉ. पूजा पंत ने कहा कि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों को इस क्षेत्र के लिए नए किस्मों और कृषि तकनीकों को अध्ययन करके नई पद्धति का विकास करने में मदद करेगी।