गुरुग्राम (कमल शर्मा)। रविवार सुबह गुरुग्राम में द्वारका एक्सप्रेसवे पर दौलताबाद के पास निर्माणाधीन फ्लाईओवर का एक हिस्सा टूटकर गिर गया। ऐसा न तो पहली बार हुआ है और न ही यह आखिरी घटना होगी। इससे पहले भी सोहना रोड पर इसी तरह का हादसा हो चुका है। उस हादसे से भी नेशनल हाईवे के अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया और मनमाने तरीके से अक्षम लोगों को जुटाकर निर्माण किया जाता रहा है। बार-बार हो रहे इन हादसों की जांच के लिए स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर परिवहन मंत्रालय की ओर से हाई पावर कमेटी बना दी जाती हैं। छह महीने से लेकर एक साल में मानवीय चूक और तकनीकी कमियां बताकर उनकी लीपापोती करते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गईं हैं। एक तो रिपोर्ट ही लचर होती है। दूसरे जो भी थोड़ा बहुत कार्रवाई के लिए कहा जाता है, वह भी नहीं होता।
बार-बार हो रहे इन हादसों को लेकर लोगों के सवाल हैं लेकिन उनका जवाब देने को कोई तैयार नहीं है। इस हादसे के बाद सोशल मीडिया पर बहस होने लगी है कि बार-बार हो रहे इन हादसों के लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं। किसकी जवाबदेही है। क्या इनके निर्माण को लेकर जल्दबाजी की जा रही है या फिर निर्माण की क्वालिटी में मानकों को दरकिनार किया जा रहा है। निर्माण के लिए जो कांट्रेक्ट हुआ था, उसके अनुसार काम किया जा रहा है या नहीं। इस तरह के तमाम सवाल हैं, जिनका जवाब जिम्मेदार अधिकारियों और राजनेताओं से मांगा जा रहा है।
दो साल पहले भी हुआ था हादसा
सोहना रोड पर दो साल पहले हादसा हुआ था। ठीक उसी तर्ज पर रविवार की सुबह द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान दौलताबाद के आसपास यह हादसा हुआ है। पूर्व में हुए इसी तरह के हादसे के बावजूद दौलताबाद में हुए इस हादसे से साफ हो गया है कि अधिकारी और उनकी तकनीकी टीम पिछली घटनाओं से सबक नहीं ले रही है। पुरानी घटनाओं की अनदेखी करके इंजीनियर निर्माण करा रहे हैं। यह अच्छा है कि अब तक इस तरह की जो भी घटनाएं हुईं हैं। उनमें किसी की जान नहीं गई है। कुछ लोग घायल जरूर हुए हैं।
निगरानी के लिए हो स्वतंत्र एजेंसी
गुरुग्राम में इन दिनों दो दर्जन से अधिक बड़े प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। सभी जीएमडीए, एनएचएआई, मैट्रो, नगर निगम, हुडा एजेंसियां करा रही हैं। इनके द्वारा कराए जा रहे निर्माण की गुणवत्ता, लागत और समय सीमा पर निगरानी के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति बने। जिसमें देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ हों। बेहतर यह हो कि इस तरह की कमेटी में रिटायर्ड व्यक्ति को रखा जाए जो कि समय-समय पर एक्सपर्ट सलाह देती रहे।
अब तक ये हुए हादसे
- सोहना रोड पर दिल्ली से अलवर रोड के निर्माण के दौरान दो पिलरों के बीच का सिगमेंट ध्वस्त हुआ
- गुरुग्राम में हीरो होंडा चौक पर फ्लाईओवर निर्माण के दौरान गिरा था
- इफ्को चौक पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर का एक हिस्सा ध्वस्त हुआ था
- निर्माण के दौरान पटौदी से रेवाड़ी रोड पर हादसा
- पहाड़ी फाटक के निकट फ्लाईओवर का एक हिस्सा इसी तरह ध्वस्त हुआ
देश भर से हो रही सोशल मीडिया पर टिप्पणी
सोशल मीडिया में फेसबुक तथा अन्य माध्यमों से इस घटना के बाद लोगों की तल्ख टिप्पणी हैं। कोई लापरवाही बता रहा है तो कोई कमीशन के कारण घटिया निर्माण। पिछले हादसों में जांच कमेटी और उसके बाद हुई लीपापोती के बाद इस घटना की जांच का हश्र भी पुरानी घटनाओं की तरह का बता रहे हैं।
फेसबुक पर मुंबई से उमेश गुप्ता का कहना है कि यह मानवीय चूक नहीं। दुर्घटना है। गुरुग्राम के शंकर मंगला का कहना है कि यह लापरवाही है, क्योंकि वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी साइड पर नहीं जाते हैं और सब कुछ जूनियर और कांट्रेक्टर के कर्मियों पर छोड़ दिया जाता है। सतबीर सांगवान का कहना है कि बड़े खिलाड़ियों के खेल के कारण ही इस तरह के बड़े हादसे हो रहे हैं। विक्रांत मंगला का कहना है कि पिछली घटनाओं की जांच रिपोर्ट पर कुछ नहीं हुआ। इसलिए बड़े खेल करने वाले गोलमाल और लापरवाही के आदी हो गए हैं। उन पर अंकुश तभी लगेगा जब बड़ों पर शिकंजा कसा जाए।
शुक्र है कि मजदूर कम थे
इस साइड पर आम दिनों में करीब 60 से 70 मजदूर काम करते हैं लेकिन होली के त्योहार के कारण अधिकांश मजदूर काम पर नहीं थे। कुछ ही मौके पर रहे। यदि मजदूरों की संख्या सामान्य दिनों की तरह होती तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। कई लोगों की जान भी जा सकती थी।