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Gurugram News: अप्रैल से शुरू हो जाएगी अंडमान निकोबार प्रतिपूर्ति योजना

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गुरुग्राम, नूंह, चरखीदादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी जिले में चलाई जाएगी यह योजना
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- पहले चरण में 9400 एकड़ में पौधरोपण किया जाएगा।
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गुरुग्राम से करीब 3173 किमी दूर अंडमान निकोबार में विकास के लिए काटे गए पेड़ों के बदले में हरियाणा के छह जिलों में करीब ढाई करोड़ पेड़ लगाए जाने हैं। इस योजना पर इस साल के वित्तीय वर्ष में कार्रवाई शुरू हो जाएगी। अप्रैल से नर्सरियों में स्थानीय पौधे ढाक, सनई, रूंज, खैरी आदि को तैयार करने के साथ, जिन जगहों को इस योजना के लिए चिन्हित किया गया है, वहां बाड़बंदी का काम शुरू हो जाएगा।
10 साल की इस योजना के तहत गुरुग्राम के छह जिलों गुरुग्राम, रेवाड़ी, नूंह, भिवानी, महेंद्रगढ़ और चरखीदादरी में पेड़ लगाए जाने हैं। इसके लिए सरकार ने पंजाब लैंड प्रीजर्वेशन एक्ट से बदलकर वन विभाग के संरक्षित वन क्षेत्र में शामिल कर दिया है। 26 हजार एकड़ में पौधरोपण किया जाना है, इनमें करीब तीन हजार एकड़ क्षेत्र गुरुग्राम जिले का होगा।
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केंद्र सरकार की द ग्रेट निकोबार द्वीप में विकास योजनाओं के चलते करीब 8.5 लाख पेड़ काटे गए। इसकी क्षतिपूर्ति के लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव हरियाणा में पेड़ लगाए जाने का प्रस्ताव पिछले साल लेकर आए थे। निकोबार द्वीप में समुद्र तटीय इलाकों के पेड़ हैं मगर हरियाणा में जो इसकी क्षतिपूर्ति (जिसे प्रतिपूर्ति योजना का नाम दिया गया है) की जाएगी, उसमें अरावली में पुराने समय में लगाए गए विलायती कीकर की जगह देशी पेड़ पौधों को प्रमुखता दी जाएगी।
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जिले वन मंडल अधिकारी राज कुमार ने बताया कि यह तय किया जा रहा है कि अंडमान निकोबार प्रतिपूर्ति योजना 10 साल की है, मगर पहले साल 9400 एकड़ को चिन्हित कर वहां पौधरोपण का कार्यक्रम इस साल शुरू हो जाएगा। यहां देशी पेड़ों के लिए नर्सरी तैयार की जाएगी। विलायती कीकर की जगह देशी पेड़ पौधे लगेंगे। इस पूरे क्षेत्र में पारिस्थितिकी का ध्यान रखते हुए लैंड स्केप बनाए जाने हैं। जगह-जगह जलाशय बनाए जाएंगे ताकि पशु पक्षियों की संख्या में वृद्धि हो।
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