जांच में सामने आया है कि लोगों को अपने जाल में एक अनपढ़ व्यक्ति भी आसानी से फंसा लेता। जो व्यक्ति इन ठगों के जाल में फंस जाता है तो उससे पैसे कैसे निकाले इसके लिए एक महारथ व्यक्ति उन पीड़ित लोगों से बात करता था।
जामताड़ा की तर्ज पर ठगी के काले कारोबार के रूप में सामने आए हरियाणा में नूंह जिले के करीब दर्जन भर गांव आजकल देश भर में चर्चा में हैं। अपने शातिर दिमाग और काली करतूत से यहां के अनपढ़ युवा देश भर में पढ़े-लिखे लोगों के साथ ठगी की वारदात को अंजाम देने में लगे थे।
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शाम ढलते ही गांव के बाहर खेतों में ठगों की महफिल जमती थी। इसके बाद शुरू होता था ठगी का काला कारोबार। एक ही रात में लाखों के वारे-न्यारे। बीते दिनों नूंह के पुलिस कप्तान वरुण सिंगला के नेतृत्व में चले इस विशेष अिभयान ने साइबर ठगों की कमर तोड़ने का काम किया है।
गिरफ्तार किए गए 65 ठगों में से ज्यादातर को पुलिस ने तीन दिनों के रिमांड पर लिया था। इनकी रिमांड अवधि समाप्त हो चुकी है। ऐसे में उन्हें पूर्व में ही जेल भेजा जा चुका है। जबकि कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें दस दिनों के रिमांड पर लिया गया है। इनसे अभी पूछताछ जारी है।
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ठगों से पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि उनमें से ज्यादातर अनपढ़ हैं, लेकिन अपने शातिर दिमाग से वह अब तक देश के कई मेट्रो सिटी में रहने वाले लोगों के बैंक खाते खाली कर चुके हैं।
कम पढ़ाई या फिर पूरी तरह से अनपढ़ रहे इन बदमाशों की करतूत ऐसी थी कि सामने वाला उनके झांसे में आसानी से फंस जाता था। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि ज्यादातर ठग आठवीं पास भी नहीं थे। आर्मी मैन का फोटो लगाकर देशभक्ति का भरोसा देकर भी वह लोगों को ठगने से बाज नहीं आते थे।
कहीं फंसता था पेंच तो बड़ा ठग लेता था आधा कमीशन
जांच में सामने आया है कि लोगों को अपने जाल में एक अनपढ़ व्यक्ति भी आसानी से फंसा लेता। जो व्यक्ति इन ठगों के जाल में फंस जाता है तो उससे पैसे कैसे निकाले इसके लिए एक महारथ व्यक्ति उन पीड़ित लोगों से बात करता था। लड़की से अश्लील वीडियो के फेर में फंसे व्यक्ति से बड़ा ठग ही सौदेबाजी करता था। पैसे न देने पर उसकी अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की धमकी दी जाती थी। इसके बाद सभ्य व्यक्ति डर जाता और इन ठगों के चंगुल में फंस जाता था। इस तरह ठग एक व्यक्ति से लाखों रुपये तक ठग लेते हैं। इन ठगों का मीडिएटर 50 फीसदी तक कमीशन लेता था।
साइबर ठगों से पूछताछ अभी जारी है। कई नई बातें सामने आ रही हैं। पुलिस पूरी तरह से इन साइबर ठगों के नेटवर्क को तोड़ना चाहती है। ऐसे में रिमांड पर लिए गए आरोपियों की निशानदेही पर जगह-जगह दबिश दी जा रही है। जल्द ही बड़ा खुलासा किया जाएगा।- वरुण सिंगला, एसपी नूंह
खानाबदोश लोगों के बैंक एकाउंट किराए पर लेते थे आरोपी
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि ठगी का कारोबार करने वाले इन साइबर ठगों ने पुलिस को चकमा देने के लिए भी अच्छा होमवर्क कर रखा था। ठग अच्छी तरह से जानते थे कि अगर अपने ही बैंक एकाउंट में ठगी की रकम को ट्रांसफर किया तो वह आसानी से फंस जाएंगे।
ऐसे में वह ज्यादातर खानाबदोश लोगों के बैंक एकाउंट किराए पर लेते थे। पहले उनका बैंक एकाउंट खुलवाया जाता था। उनकी चेकबुक और एटीएम कार्ड पहले ही ठग अपने कब्जे में ले लेते थे। इसकी एवज में खाताधारक को पांच से दस हजार रुपये महीने बतौर किराए के रूप में दिए जाते थे। जैसे ही किसी ठगी की रकम खाते में ट्रांसफर होती, वैसे ही साइबर ठग उसके एटीएम से रकम को निकाल लेते।
रकम अगर लाखों में होती तो उसे कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करके निकाल लिया जाता। पूर्व में कई बार पुलिस ने ऐसे खाताधारकों को पकड़ने की कोशिश भी की, मगर खानाबदोश होने के कारण ऐसे लोग पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही अपने डेरा बदल देते हैं।