4.87 करोड़ के कार्यों के टेंडर 20-25 फीसदी ज्यादा रेट पर देने का आरोप, नप के तत्कालीन अधिकारियों और ठेकेदारों पर मिलीभगत का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सोहना नगर परिषद में स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर करोड़ों रुपये के काम में नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि करीब 4.87 करोड़ रुपये के स्ट्रीट लाइट लगाने के विभिन्न कार्यों के लिए तैयार किए गए टेंडर में अनुमानित दरों से करीब 20 से 25 प्रतिशत तक अधिक रेट पर काम दिए गए। राज्य चौकसी एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) गुरुग्राम ने 9 सितंबर को दर्ज प्राथमिकी में 11 लोगों को नामजद किया है। इनमें तत्कालीन चीफ इंजीनियर पंचकूला मुख्यालय देवेंद्र सिंह बाजवा, तत्कालीन एसडीओ मुख्यालय विशाल गर्ग, तत्कालीन सोहना नगर परिषद में कार्यरत प्रशासनिक अधिकारी सतीश कुमार, एसई अजय पंघाल, सचिव संजय रोहिल्ला, सचिव संदीप मलिक, कनिष्ठ अभियंता राजपाल, ओमप्रकाश के अलावा दानवीर, शोभित मल्होत्रा और अशोक कुमार शामिल हैं।
एफआईआर के अनुसार मामला वर्ष 2014 से 2015 के दौरान सोहना नगर परिषद में कराए गए स्ट्रीट लाइट के कार्यों से जुड़ा है।जांच में सामने आया कि सोहना के डॉ. भीमराव आंबेडकर चौक से नजदीकी टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स, चिल्ड प्वाइंट से फाउंटेन चौक, डॉ. आंबेडकर चौक से पलवल रोड के सेंट्रल वर्ज, दिल्ली-अलवर रोड से नौर सतीश टाइल फैक्टरी, चुंगी नंबर-1 से अग्रसेन चौक और अन्य मार्ग में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए टेंडर जारी किए गए थे। इन कार्यों के लिए 4,87,70,000 रुपये की राशि मंजूर की गई थी।
एसीबी की जांच के मुताबिक, तीन फर्मों ने सबसे कम दरें दी थीं लेकिन ये दरें विभागीय अनुमानित दरों से करीब 20 से 25 प्रतिशत अधिक थीं। एसीबी ने तत्कालीन अधिकारियों और संबंधित फर्मों के संचालकों के बीच मिलीभगत की आशंका जताई है। मामले में दस्तावेज, टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और काम की वास्तविक स्थिति की जांच की जा रही है।
अलग-अलग टेंडर तैयार करने पर भी सवाल
एफआईआर में तत्कालीन अधिकारियों पर अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग डिटेल नोटिस इनवाइटिंग टेंडर (डीएनआईटी) तैयार करने का आरोप है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन कार्यों को एक ही टेंडर में शामिल किया जाना चाहिए था। अलग-अलग टेंडर निकालने से प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और अधिक दर पर काम दिए जाने की स्थिति बनी। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ कार्यों में निर्धारित ब्रांड की स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई गईं। तकनीकी अधिकारियों की रिपोर्ट में कई जगह काम की गुणवत्ता और वास्तविक रूप से किए गए कार्यों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ मामलों में कार्य पूर्ण होने का प्रमाणपत्र भी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं मिला।
एक काम में 2.16 लाख की अतिरिक्त अदायगी
एफआईआर में एक कार्य के संबंध में तकनीकी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि बाजार दर के हिसाब से काम की लागत करीब 24.15 लाख रुपये बनती थी, जबकि इसके मुकाबले करीब 26.31 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह लगभग 2.16 लाख रुपये की अधिक अदायगी किए जाने का आरोप है।