गुरुग्राम। कोरोना संक्रमण के कारण बिना परीक्षा के हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने 10वीं के रिजल्ट में सभी विद्यार्थी 90 या इससे अधिक अंकों से पास कर दिए गए। इसमें जिले के सभी 1028 स्कूलों का परीक्षा परिणाम शत प्रतिशत रहा। जिसके कारण कोई टॉपर नहीं रहा।
इस परीक्षाफल के घोषित होने से पहले तक तरह तरह की चर्चाएं थीं। लेकिन रिजल्ट जारी हुआ तो स्थिति साफ हो गई। किसी भी छात्र के मन में शुरू से यह आशंका नहीं थी कि वह फेल तो नहीं होगा। लेकिन इतनी आशंका थी कि अंक 90 प्रतिशत या फिर उससे अधिक होंगे।
पिछले वर्षों की बात करें तो जिले को पास प्रतिशत बढ़ाने के लिए लगातार जूझना पड़ रहा था। तमाम प्रयासों के बावजूद बीते तीन वर्षों में जिले का पास प्रतिशत 69 फीसदी तक रहा है। वर्ष 2020 में जिले का पास प्रतिशत 68.22 रहा था। उस साल 14190 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी, उनमें से 9680 पास हुए थे। सबसे ज्यादा छात्र अंग्रेजी में फेल हुए थे। वर्ष 2019 में जिले का पास प्रतिशत 60.60 फीसदी रहा। इस वर्ष परीक्षा परिणाम को लेकर उत्साह कम ही दिखाई दिया। क्योंकि सभी को पता था कि पास तो होना है, वह भी ज्यादा अंक मिलेंगे।
आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम जारी
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड नेे शुक्रवार को मूल्यांकन के आधार पर ही परिणाम जारी किया है। इसमें शिक्षा बोर्ड ने आंतरिक मूल्यांकन अंक और प्रायोगिक परीक्षाओं के अंकों को आधार मानकर सभी छात्रों को पास किया गया है। ऐसे में 10वीं कक्षा के वे छात्र भी पास हो गए हैं, जो कि पढ़ाई में काफी कमजोर थे। उनकी बोर्ड परीक्षाओं में पास होने की संभावना न के बराबर ही थी। लेकिन आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर उनको अच्छे अंक मिले हैं। अब सवाल यह है कि अगली कक्षा में उक्त छात्र कैसे अपनी पढ़ाई को क्षमता को बढ़ा पाएंगे। ऐसे में 11वीं कक्षा का वार्षिक परिणाम खराब होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
10वीं कक्षा की परीक्षाएं रद्द करके आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम घोषित करना प्रदेश सरकार और शिक्षा निदेशालय का निर्णय है। लेकिन परीक्षाओं का आयोजन कराकर ही सही मूल्यांकन हो पाता। क्योंकि बीते वर्षों में 10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम 55 से 65 फीसदी तक ही रहा है। जो बच्चे मेहनत करते थे, वह पास होते थे। वहीं अबकी बार शत-प्रतिशत परिणाम देकर बच्चों की पढ़ाई का आकलन नहीं किया जा सकता। भविष्य में ऐसी परिस्थिति को लेकर शिक्षा बोर्ड को ठोस निर्णय लेना होगा।
- सत्यनारायण यादव, शिक्षक एवं राज्य उपप्रधान, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ।
मूल्यांकन आधार पर छात्रों की पढ़ाई की क्षमता को नहीं जांचा जा सकता। जबकि परीक्षाएं आयोजित होने पर छात्रों द्वारा पढ़ाई पर की गई मेहनत के अंक मिलते हैं। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण बोर्ड परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा सकी और इस तरह से शिक्षा बोर्ड को परिणाम घोषित करना पड़ा। लेकिन भविष्य में शिक्षा बोर्ड को भी ऐेसी परिस्थितियों को लेकर पूरी योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना होगा, ताकि परीक्षाएं आयोजित कराकर ही बेहतर परिणाम घोषित किया जा सके।
- सुनील शर्मा, प्राचार्य, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जैकबपुरा।
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कोरोना महामारी के कारण वर्तमान में बनी परिस्थितियों को लेकर प्रदेश सरकार और शिक्षा निदेशालय का अच्छा निर्णय है। क्योंकि बोर्ड परीक्षाओं को लेकर छात्र काफी चिंचित थे। ऐसे में बोर्ड परीक्षाएं रद्द करके मूल्यांकन के आधार पर परिणाम जारी किया गया है। अगली कक्षा में पढ़ाई को लेकर बच्चों को मेहनत करनी होगी, ताकि 11वीं कक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
- कैप्टन इंदू बोकन, जिला शिक्षा अधिकारी, गुरुग्राम।