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Gurugram News: सभी सोसाइटियों को डीजल से सीएनजी में बदलने होंगे जेनसेट

Mon, 24 Jul 2023 12:10 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
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बिजली कटौती की मार झेल रहे लोगों को अब सताने लगी ग्रीन जेनसेट की चिंता, 30 से 35 लाख खर्च करने होंगे
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। कम क्षमता के कनेक्शन के कारण घंटों बिजली कटौती की मार झेल रही सोसाइटियों के लोगों को अब ग्रीन जेनसेट की चिंता भी सताने लगी है। इस समय जब 10 -11 घंटे तक पावर कट होता है, सोसाइटियों में जेनसेट से काम चल जाता है। लोगाें को भले ही डीजल आधारित जेनसेट के लिए सामान्य बिजली के बिल की तुलना में अधिक रुपये देने पड़े मगर बिजली जैसी आवश्यक सेवा से महरूम नहीं होना पड़ता है। मगर जब प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान ग्रैप के नियमों के साथ वायु प्रदूषण कम करने के लिए बड़े जेनसेट को ग्रीन जेनसेट में परिवर्तित कराकर इस्तेमाल करने का निर्देश कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) ने जारी किया है। व्यवसायिक और औद्योगिक संगठनों को अपने जेनसेट को डीजल से सीएनजी में तब्दील कराकर दोहरी व्यवस्था वाला बनाना होगा। दिल्ली एनसीआर में ग्रीन जेनसेट में परिवर्तन के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। एक अक्टूबर से नई व्यवस्था के तहत जेनसेट को ग्रीन ईंधन के साथ जुड़वा दिया जाना है।
विभिन्न सोसाइटियों के लोगों का कहना है कि हर सोसाइटी के बिल्डर को ग्रीन जेनसेट सोसाइटी के निर्माण के साथ ही इंस्टॉल करना था मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। अब जेनसेट को ग्रीन यानी सीएनजी आधारित करना होगा तो औसतन एक सोसाइटी को 30 से 35 लाख रुपये खर्च करने होंगे। बिल्डर इसके लिए सोसाइटी के लोगों से पैसे वसूलने की तैयारी कर रहा है। सीएक्यूएम के निर्देश को लेकर सोसाइटियों में हलचल है। 19 किलोवाट के सभी जेनसेट को सीएनजी में बदलना है। स्थिति यह है कि सेक्टर 79 के मैपस्को माउंटविले के लोगों ने बिजली निगम को लिखा है कि एक महीने में वे लोग 18 लाख रुपये औसतन जेनसेट के डीजल पर खर्च कर रहे हैं। आरडब्ल्यूए अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह कहते हैं कि समस्या के मूल में बिजली निगम की विफलता है, बिजली निगम नियमानुसार 33 केवी सबस्टेशन बनाने पर बिल्डर को विवश नहीं कर रहा है। 11 केवी के लोड पर कई सोसाइटियां निर्भर हैं। आए दिन फॉल्ट आते हैं, ऐसे में घंटों बिजली कटौती होती है। अगर बिजली निगम वादे के अनुसार 24 घंटे बिजली दे तो हमें ऐसी दिक्कत नहीं आएगी।
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हालांकि सभी सोसाइटियों को जेनसेट को हरित यानी सीएनजी में तब्दील कराना ही होगा, ऐसे में बिल्डर लाइसेंस कॉलोनियों में रहने वाले लोगों पर यह दोहरी आर्थिक मार होगी।


निर्माण कार्य के कारण भी कटते हैं केबल
द्वारका एक्सप्रेस वे की 106 सोसाइटियों की एक बड़ी समस्या आए दिन केबल फॉल्ट की भी है। दूर से अंडरग्राउंड केबल लाए गए हैं। इस ओर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। कई कंस्ट्रक्शन साइट, सड़क, पुल आदि के निर्माण हो रहे हैं। ऐसे में आए दिन बिजली के अंडरग्राउंट केबल कट जाते हैं। केबल कटने, उसे ढूंढने और मरम्मत के कार्य में कई बार 12 से 13 घंटे लग जाते हैं। इनसे जुड़ी सोसाइटियों के लोगों को जेनसेट पर निर्भर रहना पड़ता है। पिछले दिनों गढ़ी हरसरु और मानेसर में आए फॉल्ट के कारण कई सोसाइटियां प्रभावित रही है।



लोगों ने कहा
हम लोगों के पास 33 केवीए सबस्टेशन नहीं है। द्वारका एक्सप्रेस वे पर करीब 106 सोसाइटियों में से शायद ही कोई हो जहां कम लोड, बार-बार केबल फॉल्ट के कारण बिजली कटौती नहीं होती हो। हाइराइज सोसाइटियों में जेनसेट बिजली की आवश्यक आवश्यकता है। 800 किलो वाट के जेनसेट को सीएनजी में कंवर्ट कराने का बहुत खर्च आएगा। किसी भी सोसाइटी में बड़े जेनसेट उनके मानदंड के हिसाब से ग्रीन नहीं हैं। करीबन 30 से 35 लाख रुपए एक सोसाइटी के जेनसेट को डीजल से सीएनजी के कंवर्ट कराने में आएंगे। यह हम क्यों झेले
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- नवदीप सिंह, एटीएस ट्रायंफ, सेक्टर 104

पिछले दिनों हमने करीब 11 घंटे बिजली कटौती की मार झेली है।बिजली निगम बिल्डर से 33 केवीए सबस्टेशन बनवाने में अक्षम रहा है। अब ग्रीन जेनसेट के बहाने हम पर आर्थिक भार देकर प्रशासन उपभोक्ताओं को किस तरह की सजा दे रहा है। हमने पिछले दिनों केबल फॉल्ट के कारण 11 जुलाई को 12 घंटे, 12 जुलाई को डेढ़ घंटे और 13 जुलाई को 3.5 घंटे बिजली कटौती की मार झेली है।
- प्रवीण ठाकुर, हैबिटेट सेासाइटी सेक्टर 99ए
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