दिल्ली आईआईटी की टीम डेटा की निगरानी करेगी, पक्षियों की प्रजातियों, संख्या और आवाजाही का डेटा होगा रिकॉर्ड
विराट त्यागी
गुरुग्राम। हर साल हजारों किलोमीटर का सफर तय कर सुल्तानपुर के नेशनल पार्क में पहुंचने वाले प्रवासी पक्षियों की उड़ान, उनकी पसंद और वापसी के सफर पर अब एआई कैमरों की नजर रहेगी। सुल्तानपुर नेशनल पार्क में लगाए गए 30 कैमरे न केवल यहां आने वाले पक्षियों की प्रजातियों और संख्या का पता लगाने में मदद करेंगे, बल्कि उनकी आवाजाही से जुड़े पैटर्न को समझने का प्रयास किया जाएगा।
दिल्ली आईआईटी की टीम इन कैमरों से मिलने वाले डेटा की मॉनिटरिंग करेगी और साप्ताहिक व मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इन कैमरों के जरिये पार्क में आने वाले पक्षियों के साथ उनके वापस लौटने की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी। साप्ताहिक और मासिक रिपोर्ट से यह समझने में मदद मिलेगी कि प्रवासी पक्षी किस अवधि में पार्क पहुंचते हैं, कितने समय तक यहां रुकते हैं और कब वापस लौटते हैं। पक्षियों की निगरानी की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सुल्तानपुर पार्क के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की मौजूदगी देखने को मिल रही है।
तीन वर्षों के आंकड़ों में दिखा पक्षियों की संख्या का अंतर
वेटलैंड्स इंटरनेशनल की फरवरी 2025 में जारी एशियाई वॉटरबर्ड जनगणना (एडब्ल्यूसी) की रिपोर्ट के अनुसार, सुल्तानपुर नेशनल पार्क में वर्ष 2023 में 51 प्रजातियों के कुल 9,026 पक्षी गिने गए थे। वर्ष 2024 में 43 प्रजातियों के 2,686 पक्षी दर्ज किए गए, जबकि वर्ष 2025 में 48 प्रजातियों के कुल 2,593 पक्षियों की गणना हुई। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में दर्ज 51 प्रजातियों में 21 निवासी और 30 प्रवासी प्रजातियां शामिल थीं। वर्ष 2024 में 26 निवासी और 17 प्रवासी प्रजातियां दर्ज की गईं। वहीं, वर्ष 2025 में 29 निवासी और 19 प्रवासी प्रजातियां मिलीं। इस तरह वर्ष 2025 में प्रजातियों की विविधता में पिछले साल के मुकाबले वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि पक्षियों की कुल संख्या में मामूली गिरावट रही। रिपोर्ट के मुताबिक, विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही पांच प्रजातियां वर्ष 2024 और 2025 दोनों में देखी गईं। यह क्षेत्र की जैव विविधता और पक्षियों के संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जिला वन्य जीव अधिकारी आरके जांगड़ा ने बताया कि सुल्तानपुर नेशनल पार्क में लगाए गए कैमरों से मिलने वाले डेटा के जरिये पक्षियों की आवाजाही और उनकी मौजूदगी से जुड़े पैटर्न का अध्ययन किया जा सकेगा। इससे पक्षियों के मौसमी प्रवास और उनके आवास से जुड़ी परिस्थितियों का आकलन करने के लिए भी उपयोगी जानकारी मिलने की उम्मीद है।