उपभोक्ता आयोग से , जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दिया आदेश
नंबर गेम- 4.88 लाख रुपये देने होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पुरानी बीमारी के बारे में बीमा कंपनी को न बताने पर रोके गए क्लेम को अब बीमा कंपनी ब्याज के साथ वापस करेगी। बीमा कंपनी 4.88 लाख रुपये नौ प्रतिशत की दर से बीमा धारक को देगी। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
मियांवाली कॉलोनी निवासी शिव दर्शन ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि पार्किंसनिज्म और एरिथ्रोडर्मा सहित कई बीमारियों के उपचार के लिए फोर्टिस अस्पताल में भर्ती हुए थे। उन्होंने 4,88,500 रुपये के चिकित्सा खर्च का दावा किया था। बीमा कंपनी ने 23 अगस्त 2019 को दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि शिकायतकर्ता ने पार्किंसनिज्म जैसी पुरानी बीमारी का खुलासा नहीं किया था। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के नियमों के अनुसार, बीमाकर्ता का कर्तव्य है कि वह पॉलिसी जारी करने से पहले बीमाधारक की पूरी चिकित्सा जांच कराए। यदि बीमा कंपनी ने ऐसा नहीं किया है, तो वह बाद में पुरानी बीमारी के आधार पर दावा खारिज नहीं कर सकती है।
आयोग ने यह भी कहा कि पार्किंसनिज्म और एरिथ्रोडर्मा जैसी बीमारियां किसी भी समय हो सकती हैं। बीमा कंपनी को पॉलिसी जारी करते समय बीमाधारक की आयोग ने बीमा कंपनी को 4.88 लाख रुपये की मूल राशि पर 23 अगस्त 2019 से 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया है। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी पर 50 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 22 हजार रुपये भी दिए जाएंगे।