एसवाईएल मुद्दे पर सरकार नरम, विपक्ष हावी
सतलुज-यमुना-लिंक (एसवाईएल) नहर के मामले में राज्य सरकार जहां नरम रुख अपनाए हुए है, वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की हुई है। मुख्य विपक्षी इनेलो ने सोमवार को प्रदेश के लोगों से सड़क पर उतरने की अपील की है।
यही नहीं पार्टी ने पंजाब जाने वाले रास्तों को बंद करने की धमकी दी है। रविवार को यहां आए कृषि मंत्री के बयान से ये साफ झलक रहा था कि सरकार अब तक एसवाईएल मुद्दे को लेकर नरम रुख अपनाए हुए है।
प्रदेश के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि एसवाईएल नहर के मामले में कानूनी रूप से हरियाणा का पक्ष मजबूत है और इनेलो के पंजाब के रास्ते जाम करने के कार्यक्रम से हरियाणा के पक्ष को ठेस पहुंचेगी। इससे प्रदेश में माहौल खराब होगा। वह रविवार को एसडी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में आयोजित महाराजा दक्ष प्रजापति जयंती समारोह में शामिल होने आए थे।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए धनखड़ ने इनेलो के पंजाब के रास्ते जाम करने की चेतावनी को महज दिखावा बताया और कहा कि इससे कुछ हासिल होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए इनेलो प्रदेश का माहौल खराब करने पर उतारू है। धनखड़ ने कहा कि कानून की लड़ाई कानूनी रूप से ही लड़ी जाती है।
पूर्व मुख्यमंत्री पर कृषि मंत्री ने साधा निशाना
स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट प्रदेश में लागू करने संबंधी पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन आयोग का गठन पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने नवंबर 2004 में किया था। इस आयोग ने अक्तूबर 2006 में अपनी रिपोर्ट दे दी थी। उसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में इस आयोग की रिपोर्ट लागू करने के लिए कमेटी का गठन किया गया।
हुड्डा ने भी दिसंबर 2010 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी परंतु उसे लागू नहीं करवाया। रिपोर्ट सौंपने के बाद भी हुड्डा सवा तीन साल मुख्यमंत्री रहे। अब किसान हितैषी होने का दम भरने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सर्वप्रथम किसानों से रिपोर्ट लागू नहीं करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हुड्डा ने किसानों को 10 हजार रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा देने की सिफारिश की थी जबकि वर्तमान मनोहर सरकार 12 हजार रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा खराब फसलों के लिए किसानों को दे चुकी है।
धनखड़ ने कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा को किसान पंचायत में यह भी बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में किसानों को मात्र ढाई रुपए के भी चेक दिए गए, जबकि मनोहर सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में ढाई हजार करोड़ रुपए का मुआवजा किसानों को दिया है।