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पीएसपी पीड़ित द्वारा बरती गई छोटी से लापरवाही बन सकती है जानलेवा

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पीएसपी पीड़ित की जरा सी लापरवाही बन सकती है जानलेवा
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गुरुग्राम। प्रोग्रेसिव सुपरान्यूक्लियर पाल्सी (पीएसपी) से ग्रसित फिल्म अभिनेता कादर खान का मंगलवार को निधन हो गया। गुरुग्राम में भी इस बीमारी से पीड़ित 10-12 लोग हैं, जिनका निजी अस्पताल में न्यूरो रोग विशेषज्ञ की देखरेख में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों की मानें तो यह एक दुर्लभ मस्तिष्क रोग है। यह मस्तिष्क की उन कोशिकाओं को प्रभावित करता है जो आंख की गतिविधियां नियंत्रित करती हैं। इसकी वजह से संतुलन और चलने-फिरने के तरीके में गंभीर और स्थायी समस्याएं आ जाती हैं।
आमतौर पर यह रोग 60 वर्ष से अधिक के लोगों को होता है। डॉक्टरों के मुताबिक, पीड़ित द्वारा बरती गई छोटी सी भी लापरवाही उसके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। यदि समय पर लक्षणों की पहचान कर इलाज किया जाए तो इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। रॉकलैंड अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक अग्रवाल कहते हैं प्रोग्रेसिव सुपरान्यूक्लियर पाल्सी तब होती है, जब तउ (टीएयू) नामक प्रोटीन के बिल्ड-अप की वजह से दिमाग के एक हिस्से में ब्रेन सेल्स खराब हो जाते हैं। तउ आमतौर पर दिमाग में होते हैं और उच्चतम स्तर तक पहुंचने से पहले टूटकर बिखर जाते हैं. लेकिन जो लोग पीएसपी से जूझ रहे होते हैं, उनके मामले में ये ठीक तरह से नहीं टूटते और ब्रेन सेल्स में खतरनाक गुच्छे बन जाते हैं।
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इंडियन साइकैटरी सोसायटी के नॉर्थ जोन के अध्यक्ष व वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मदीप सिंधू कहते हैं कि यह बीमारी असामान्य है। समय पर इसकी पहचान करना बहुत जरूरी है। पीएसपी का कोई इलाज या कोई प्रभावशाली उपचार नहीं है। चलने में सहायक उपकरणों, विशेष चश्मों और कुछ दवाओं से कुछ हद तक सहायता मिल सकती है, लेकिन समय के साथ यह बीमारी गंभीर हो जाती है।
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ये हैं पीएसपी के लक्षण
चलने में दिक्कत आना
भाषा में परिवर्तन और निगलने में समस्या आना
प्रकाश की संवेदनशीलता
निद्रा संबंधी परेशानियां
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