बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में बिजली कटौती से प्रभावित होता है जल शोधन
मुख्यमंत्री ने किया शिलान्यास, 23.40 करोड़ के खर्च से 15 महीने में हो जाएगा तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 66 केवी बिजली सबस्टेशन के शिलान्यास से बिजली संकट के समाधान का रास्ता निकल जाएगा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में अपना सबस्टेशन नहीं होने के कारण बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है। इस प्लांट से शहर को करीब 240 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमएलडी) पानी की आपूर्ति होती है।
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 24 घंटे बिजली की आवश्यकता होती है। मशीनें चलने से पानी का चक्र नहीं थमता। विशेषज्ञों के अनुसार एक बार की बिजली ट्रिपिंग से शहर में पानी की आपूर्ति में करीब 20 प्रतिशत कमी आ जाती है। बसई प्लांट में अभी तक 11 केवी की लाइन से काम चल रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ऑन लाइन तरीके से बसई के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 66 केवी बिजली सबस्टेशन बनाए जाने का शिलान्यास किया है। यह सबस्टेशन 15 महीनों में तैयार हो जाएगा। इसमें सरकार का 23.40 करोड़ रुपया खर्च होगा।
जीएमडीए के बिजली से संबंधित कार्यकारी अभियंता क्षितिज कुमार ने बताया कि 66 केवी वोल्टेज से ट्रिपिंग की काफी समस्या कम होगी। 11 केवी वोल्टेज के कारण सबस्टेशन में बिजली जाती रहती है। खास तौर पर मानसून के समय कई बार ट्रिपिंग होती है, इससे नहरी पानी शोधन बाधित होता है। इन दिनों प्लांट में कई बार कटौती हो रही है। इस कारण शहर में कम पानी की आपूर्ति हो पा रही है। सबस्टेशन बनने के बाद डब्ल्यूटीपी में बिजली की समस्या का काफी हद तक हल हो जाएगी।
बहराम के 66 केवी सबस्टेशन का सेक्टर 72 के बूस्टिंग स्टेशन को भी लाभ
बहरामपुर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में भी 15.92 करोड़ रुपये के खर्च से बिजली का सब स्टेशन बनाया जाएगा। अभी इस प्लांट में 11 केवी वोल्टेज से काम चलाया जा रहा था। इस सबस्टेशन से प्लांट में आने वाली ट्रिपिंग के कारण होने वाली परेशानियां कम होंगी। बारिश के वक्त बिजली कटने की ज्यादा घटनाएं होने से सीवेज ट्रीटमेंट भी काफी प्रभावित होता है। बहराम के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में बनाए जा रहे सब स्टेशन का लाभ आने वाले दिनों में सेक्टर 72 में बनने वाले बूस्टिंग स्टेशन को होगा। सेक्टर 72 में एक बूस्टिंग स्टेशन बनाया जा रहा है, जिससे सेक्टर 77 से 79 तक सोसाइटियों को जलापूर्ति हो सकेगी। अभी इस इलाके में जीएमडीए के नहरी पानी की लाइन नहीं होने के कारण भूजल या टैंकर पर सोसाइटियों के लोग निर्भर है। इस बूस्टिंग स्टेशन को भी बहरामपुर के 66 केवी सबस्टेशन से बिजली मिलेगी। इसे पूरा होने में भी 15 महीने का समय लगेगा।