अब तक डेंगू के 32 मरीज, 4 में मलेरिया की पुष्टि
गुरुग्राम। मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के उद्देश्य से जिला उपायुक्त अमित खत्री की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को जिला स्तरीय मलेरिया वर्किंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई। इसमें डेंगू व मलेरिया की प्रभारी डॉ. सुधा गर्ग ने बताया कि जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जून से लेकर अब तक जिले में 1081368 घरों का सर्वे किया है, जिसमें से मच्छरों का लार्वा मिलने पर 3708 लोगों को नोटिस जारी की गई है। उपायुक्त अमित खत्री ने कहा कि जिले में 2015 के बाद मलेरिया और डेंगू के मामलों में कमी आई है, लेकिन फिर भी हम सभी को सतर्क रहते हुए मच्छरों को पनपने से रोकना है। मच्छरों की रोकथाम को लेकर उन्होंने बैठक में विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां भी सौंपी। इसके तहत निर्माण स्थलों पर मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए डीटीपी को जिम्मेदारी दी गई।
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पंचायतें खरीदें फॉगिंग मशीन
उपायुक्त ने मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए जिले के लोगों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि मलेरिया , डेंगू, चिकनगुनिया जैसे रोगों को हम मच्छरों को पैदा होने से रोककर ही कम कर सकते हैं। उन्होंने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी नरेंद्र सारवान से कहा कि ग्राम पंचायतें अपनी फॉगिंग मशीन खरीद लें तो बेहतर रहेगा क्योंकि इनकी लागत ज्यादा नहीं है और इनमें डाली जाने वाली दवा स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
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डेंगू मलेरिया व चिकनगुनिया के मरीजों में आई कमी
बैठक में जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुधा गर्ग ने बताया कि जिले में 2015 में डेंगू के 451 मामले आए थे। उसके बाद लोगों के सहयोग तथा जागरूकता की वजह से मामलों में निरंतर कमी देखी गई है। 2016 में डेंगू के 86 मामले, 2017 में 66 मामले, 2018 में 93 मामले, 2019 में 22 व तथा इस वर्ष अब तक महज 32 मामले आए हैं। चिकनगुनिया के मामलों में भी गिरावट देखी गई है, जिसमें वर्ष -2016 में 39 मामले, 2017 में 3 मामले और उसके बाद 2018 से लेकर इस वर्ष अब तक एक भी मामला सामने नहीं आया है। मलेरिया के आंकड़े देते हुए डॉ. सुधा गर्ग ने बताया कि 2015 में मलेरिया के 67 मामले सामने आए थे। उसके बाद 2016 में 38 मामले , 2017 में 48 मामले, 2018 में 30 मामले, 2019 में 15 मामले और इस वर्ष अब तक केवल 4 मामले सामने आए हैं।