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30 साल पुरानी दीवार टूटी, 300 घरों में घुसा पानी: गुरुग्राम के लोगों ने डीटीपी पर उठाए सवाल, देखें वीडियो

Fri, 04 Sep 2026 07:39 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम

सार

दीवार टूटने के बाद से ग्रीनवुड सिटी के ए ब्लॉक में स्थिति गंभीर हो गई है। हल्की बारिश में भी घरों में पानी घुस जाता है। इससे निवासियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
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300 घरों में घुसा पानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गुरुग्राम जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विभाग ने एक लाइसेंस्ड कॉलोनी में बनी 30 साल पुरानी ''टो वॉल'' और फेंसिंग को तोड़ दिया है। इस कार्रवाई के बाद ग्रीनवुड सिटी के ए ब्लॉक में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। मात्र 20 मिनट की बारिश में ही सेक्टर 45 का सारा पानी अब इस आवासीय क्षेत्र के करीब 300 निवासियों के घरों में घुस रहा है।

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डेवलपर्स द्वारा बनाई गई थी दीवार
निवासियों का आरोप है कि डीटीपी ने उपायुक्त (डीसी) के मौखिक आदेशों का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की। यह दीवार और फेंसिंग लाइसेंस्ड कॉलोनी के डेवलपर्स द्वारा बनाई गई थी। ग्रीनवुड सिटी के ए ब्लॉक के निवासी अजीत पूनिया ने बताया कि इस तोड़फोड़ के कारण उनकी सुरक्षा और बचाव खतरे में पड़ गया है। 

जोखिम में बच्चे और बुजुर्ग
उन्होंने कहा कि सरकार का मौलिक कर्तव्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन इस कार्रवाई से करदाताओं और शांति से रहने वाले परिवारों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से बच्चे और बुजुर्ग इस स्थिति में सबसे अधिक जोखिम में हैं। निवासियों ने प्रशासन से इस समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग की है। उन्होंने पूछा है कि इस बुरी हालत के लिए कौन जिम्मेदार है।
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जलभराव से निवासियों की परेशानी
दीवार टूटने के बाद से ग्रीनवुड सिटी के ए ब्लॉक में स्थिति गंभीर हो गई है। हल्की बारिश में भी घरों में पानी घुस जाता है। इससे निवासियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक है। निवासियों को अपने घरों में सुरक्षित रहने में भी मुश्किल हो रही है। निवासियों ने डीटीपी विभाग की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मौखिक आदेशों पर इतनी पुरानी संरचना को तोड़ना उचित नहीं था। प्रशासन को निवासियों की सुरक्षा और कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए थी। इस तोड़फोड़ से पहले वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई, यह भी एक बड़ा प्रश्न है। निवासियों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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