डॉक्टरों ने देरी से दी गर्भवती व शिशु की जान को खतरे की जानकारी : परिजन
गुरुग्राम। नागरिक अस्पताल में मंगलवार को मृत बच्चे को जन्म देने वाली गर्भवती के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने गर्भवती व कोख में शिशु की जान को खतरे की जानकारी उन्हें देरी से दी थी। समय रहते अगर इस खतरे से अवगत करा दिया जाता तो वह महिला को किसी अन्य अस्पताल में ले जा सकते थे। शायद शिशु की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि परिजनों ने इस मामले में कोई शिकायत नहीं दी है, लेकिन उन्होंने डॉक्टरों द्वारा मरीज के इलाज में बरती गई लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
मूलरूप से यूपी के फैजाबाद निवासी शक्तिराम अपने परिवार के साथ दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर स्थित कापसहेड़ा गांव में रहते हैं। शक्तिराम के मुताबिक मंगलवार को वह अपनी गर्भवती पत्नी गुंजन को प्रसव पीड़ा होने पर सुबह करीब 12:30 बजे सिविल लाइन स्थित नागरिक अस्पताल लाए थे। यहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की। इसके बाद 2 घंटे तक महिला का कोई उपचार नहीं किया गया। करीब 2 बजे उन्हें सूचित किया गया कि बच्चे की धड़कन नहीं है, महिला और शिशु की जान को खतरा है। दोनों में से किसी एक को ही बचाया जा सकता है। इसी बाबत उनसे एक फॉर्म पर भी हस्ताक्षर करवाए गए। करीब 3:28 मिनट पर महिला का प्रसव हुआ, जिस दौरान उसने मृत बच्चे को जन्म दिया।
शक्तिराम का आरोप है कि जिस समय वह अपनी पत्नी को अस्पताल लाए थे, तब बच्चे की धड़कन चल रही थीं। हाल ही में कराए अल्ट्रासाउंड में बच्चा स्वस्थ था। यहां डॉक्टरों ने उन्हें खतरे की जानकारी देरी से दी। वहीं अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार का कहना है कि यह मामला यूआईडी (बच्चे के उल्टा होने का) का था। मरीज को पहले ही बता दिया गया था कि बच्चे को बचाया नहीं जा सकता है।
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