गुरुग्राम। साइबर सिटी की पुलिस ने छह माह में 12 फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया है मगर आरोपियों को सजा दिला पाने में नाकाम साबित हो रही है। कारण, साइबर लैब की पांच किमी दूरी पर स्थित डाइटेक से उपकरणों की जांच रिपोर्ट नहीं ले पा रहा है। अधिकारी मानते हैं कि समय से लैब की रिपोर्ट न मिल पाने के कारण अदालत में पेश नहीं हो पाती है।
जिले में आए दिन फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हो रहा है। साइबर थाना पुलिस अब तक ऐसे 12 कॉल सेंटर का खुलासा कर चुकी है। मगर उसमें गिरफ्तार आरोपी जमानत पर आसानी से छूट जाते हैं। दरअसल, लगने वाली धारा और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्य के आधार पर उनको जमानत मिलती है।
ट्रैफिक टावर में डाइटेक है जिसमें प्रदेश भर से कंप्यूटर, लैपटॉप व हार्डडिस्क जांच के लिए आते हैं। डिजिटल इन्वेस्टिगेशन टेक्निकल एनलसिस सेंटर ट्रैफिक टावर में चौथी मंजिल पर है। यहां से साइबर थाने की दूरी पांच किमी है। तालमेल का अभाव कहे या जांच की गति धीमी होने का लाभ आरोपियों को मिलता है।
फर्जी कॉल सेंटर के दो आरोपी पुलिस रिमांड पर
दो दिन पहले साइबर थाना पुलिस की ओर से हुए खुलासे के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को छानबीन के दौरान पता चला कि तीन पार्टनर मिलकर यह कॉल सेंटर चलाते थे। उनमें से दो आरोपी पुलिस की गिरफ्त में जबकि तीसरा फरार है।
पुलिस शिकायत व सूचना के आधार पर फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करती है। साइबर लैब की ओर से जांच रिपोर्ट आने में देरी होती है। जांच रिपोर्ट आने के बाद उसे अदालत में पेश किया जाता है।
- करण गोयल, एसीपी डीएलएफ, गुरुग्राम।