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स्वास्थ्य मंत्री ने लिया एंबुलेंस में डिलीवरी पर संज्ञान

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स्वास्थ्य मंत्री ने लिया एंबुलेंस में डिलीवरी पर संज्ञान
दो डॉक्टर निलंबित, एक की सेवाएं होगी समाप्त
गुरुग्राम। एंबुलेंस में सात माह की हाईरिस्क गर्भवती का प्रसव और नवजात की मौत के मामले में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने संज्ञान लिया है। इस मामले में रिपोर्ट तलब की है। वहीं, दूसरी ओर उपायुक्त की ओर से जिला मेडिकल नेग्लिजेंसी बोर्ड को जांच का जिम्मा सौंपा है। बुधवार को हुई इस घटना में परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। अब इस मामले में अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर आमने-सामने हैं। उधर इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा संज्ञान लिया है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने दो महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ज्योति डबास व हरप्रीत को निलंबित कर दिया है। इस मामले की जांच होने तक यह दोनों ही डॉक्टर निलंबित रहेंगी। इसके अलावा निविदा पर तैनात एक अन्य गायनी डॉक्टर अक्षिता की सेवाएं समाप्त करने के लिए पत्र लिखा है। इस बात की पुष्टि अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप शर्मा ने की।
अधिकारियों का कहना है कि महिला की हालत को देखने के बाद डॉक्टरों को उसे रेफर नहीं करना चाहिए था। जबकि इस मामले में गाएनी डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने महिला को प्राथमिक उपचार देने के बाद ही सभी नियमों को पूरा कर उसे रेफर किया था। हालांकि बुधवार को कहा गया था कि इस तरह के मामले में रेफर करना जरूरी था।
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प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप शर्मा का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मामले से जुड़े डॉक्टरों और स्टाफ के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। उपायुक्त ने मेडिकल नेग्लिजेंसी बोर्ड को जांच का जिम्मा सौंपा है। जांच के बाद ही कुछ साफ हो पाएगा।
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45 कदम की दूरी तय करने में मरीज को लगे 45 मिनट, होगी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। डॉक्टरों द्वारा मरीज को रेफर करने के बाद महिला को करीब 45 कदम की दूरी तय करने में ही 45 मिनट का समय लग गया। अस्पताल के प्रथम तल पर स्थित गाएनी वार्ड से महिला को एंबुलेंस तक पहुंचाने में लगे यह 45 मिनट अस्पताल प्रबंधन को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आमतौर पर एंबुलेंस को नागरिक अस्पताल से सफदरजंग अस्पताल पहुंचने में करीब 30-35 मिनट का ही समय लगता है। अगर महिला समय पर एंबुलेंस तक पहुंच जाती तो शायद उसे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। जहां नवजात की जान भी बच सकती थी।
महिला का इलाज करने वाली डॉक्टरों की मानें तो उन्होंने प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे सुबह 9.10 बजे पर ही रेफर कर दिया गया था। वहीं एंबुलेंस कंट्रोल यूनिट के कर्मचारियों की मानें तो महिला 9 बजकर 55 मिनट पर उनके पास आई थी। अस्पताल कर्मचारियों को गाएनी वार्ड से एंबुलेंस तक ही महिला को पहुंचाने में 45 मिनट का समय लग गया। जो नवजात की मौत का कारण बना।
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अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप शर्मा का कहना है कि महिला को रेफर करने के बाद भी एंबुलेंस तक पहुंचाने में इतना समय क्यों लगा है, इसकी भी जांच की जाएगी। अगर अस्पताल के किसी स्टाफ की लापरवाही के कारण यह देरी हुई होगी तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
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