एकतरफ जहां ट्रायल कोर्ट ने 2012 के निर्भया कांड में महज 10 महीने बाद 2013 में ही दोषियों को फांसी की सजा सुना दी थी, वहीं मासूम गुड़िया को निचली अदालत से न्याय मिलने में ही छह साल लग गए।
इस दौरान सात जजों ने सुनवाई की और अभियोजन ने 57 गवाहों को पेश किया। आरोपियों की गवाही में ही अदालत को 5 दिसंबर, 2018 से 25 सितंबर, 2019 तक करीब एक साल का समय लगा।
पिता ने बताया छह साल बाद कैसा है बच्ची का हाल
मेरी पत्नी घर पर बच्ची के साथ है। जब सुबह कोर्ट आ रहा था तो पत्नी ने भगवान से इंसाफ की प्रार्थना की। उसने कहा कि बच्ची इस घटना को पूरी तरह भूल चुकी है, इसलिये हम उसे इस बारे में कुछ नहीं बतायेंगे।
हम उसे वह दर्दनाक घटना याद दिलाना नहीं चाहते। इसलिए बेहतर होगा कि उसे केस के फैसले के बारे में कुछ न बताया जाये। बच्ची के पिता ने कहा कि दोषियों को फांसी की सजा के लिये भगवान से प्रार्थना करेगा।
यह वारदात निर्भया केस के बाद हुई थी और इसके विरोध में महिला व छात्राओं ने इंडिया गेट, पुलिस मुख्यालय, प्रधानमंत्री आवास व सोनिया गांधी के आवास पर विरोध प्रदर्शन किया था।
लोगों का जनसमूह तख्तियां लेकर एम्स के बाहर पहुंचा था और वहां तत्कालीन पुलिस आयुक्त नीरज कुमार का पुतला फूंकते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी। इस घटना के संदर्भ में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने कहा था कि इस तरह के अपराध से निजात पाने के लिये एकजुट होकर प्रयास की जरूरत है।