फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: जीएसटी नंबर रद्द, फिर भी 68,680 करोड़ के ई-वे बिल जारी

विज्ञापन
विज्ञापन
सीएजी रिपोर्ट में खुलासा: 8,334 करदाताओं ने पंजीकरण निरस्त होने के बाद भी किया कारोबार, विभाग समय रहते नहीं रोक सका गड़बड़ी
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली में जीएसटी निगरानी व्यवस्था में बड़ी खामी सामने आई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी पंजीकरण रद्द होने के बाद भी 8,334 करदाताओं ने 68,680.88 करोड़ रुपये मूल्य के ई-वे बिल जारी कर दिए। विभाग और ई-वे बिल प्रणाली इन करदाताओं की गतिविधियों पर समय रहते रोक नहीं लगा सकी। सीएजी ने इसे कर प्रशासन की निगरानी और तकनीकी नियंत्रण में गंभीर कमी बताया है।
सीएजी ने वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2021-22 तक के रिकॉर्ड का ऑडिट किया। ई-वे बिल डाटाबेस और जीएसटी पंजीकरण रिकॉर्ड के मिलान में यह गड़बड़ी सामने आई। इसी दौरान 4,076 ऐसे करदाता भी मिले, जिन्होंने जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं किए, लेकिन 11,635.36 करोड़ रुपये के ई-वे बिल जारी कर दिए। दोनों श्रेणियों को मिलाकर 28,198 करदाताओं के मामलों में 82,143.66 करोड़ रुपये की कर योग्य विसंगतियां मिलीं। ऑडिट के दौरान विभाग इन मामलों में संतोषजनक कार्रवाई रिपोर्ट नहीं दे सका।
विज्ञापन

रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2017 से जनवरी 2021 के बीच 28 करदाताओं का पंजीकरण रद्द किया गया था। इसके बावजूद उन्होंने पंजीकरण रद्द होने से पहले 734.75 करोड़ रुपये मूल्य के 3,629 ई-वे बिल बनाए। इन पर करीब 99.39 करोड़ रुपये का कर बनता था। नियमों के तहत उन्हें जीएसटीआर-10 दाखिल कर कर देनदारी का निपटान करना था, लेकिन किसी ने ऐसा नहीं किया। विभाग ने भी बकाया कर की वसूली के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए। ऑडिट में 70 करदाताओं की विस्तृत जांच में 3,071.92 करोड़ रुपये के कर नियमों के उल्लंघन और 3,710.17 करोड़ रुपये के टर्नओवर बेमेल होने का पता चला।

चोरी की गाड़ियों और दोपहिया वाहनों से ढोया गया करोड़ों का माल
ई-वे बिलों का परिवहन विभाग के ई-वाहन डेटाबेस से मिलान करने पर 11 करदाताओं के 18 ई-वे बिल संदिग्ध पाए गए। इनमें 4.72 करोड़ रुपये के माल के परिवहन के लिए स्क्रैप, चोरी की गाड़ियां, रद्द पंजीकरण वाले वाहन और स्कूटर-मोटरसाइकिल जैसे दोपहिया वाहन दर्ज थे। सीएजी के अनुसार, विभाग ने इन संदिग्ध लेन-देन की पर्याप्त जांच नहीं की।
विभाग में स्टाफ की भारी कमी
सीएजी ने निगरानी व्यवस्था की कमजोरी के पीछे कर्मचारियों की कमी को भी अहम कारण माना है। 2018-19 से 2021-22 के बीच कर निर्धारण करने वाले न्यायनिर्णयन अधिकारियों के 23.33 से 37 फीसदी पद खाली थे। वहीं जमीनी स्तर पर जांच करने वाले सहायक कर्मचारियों के 22.05 से 41.73 फीसदी पद रिक्त रहे। इससे रिटर्न की समीक्षा और कर चोरी के मामलों में कार्रवाई प्रभावित हुई।
विज्ञापन

सीएजी की प्रमुख सिफारिशें
-पंजीकरण रद्द करने से पहले करदाताओं के ई-वे बिल की जांच की जाए और बकाया कर की तत्काल वसूली हो।
-जीएसटीएन और ई-वे बिल कॉमन पोर्टल में ऐसे तकनीकी नियंत्रण लगाए जाएं, जिससे एक बिल पर दोबारा ई-वे बिल न बन सके। संदिग्ध वाहनों और रद्द डीलरों को सिस्टम स्वतः ब्लॉक करे।
- जीएसटी रिटर्न में सामने आए सभी 360 गंभीर बेमेल मामलों को तत्काल आगे बढ़ाकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें