आर्किटेक्ट सर्वेश अग्रवाल का कहना है कि बिल्डरों ने इमारतें तो बना दीं, लेकिन भूमिगत जलस्तर को रिचार्ज करने के लिए कोई योजना नहीं बनाई। भूमिगत जल का स्तर नीचे जाने से जमीन खोखली हो रही है। ऐसे में लगातार बारिश से जमीन की निचली सतह तक पानी जाने से मिट्टी बैठ जाती है। नतीजा, कमजोर तरीके से खड़ी की गई इमारतें ढह जाती हैं। अब तक जो हादसे हुए वहां आसपास जलभराव इस बात के संकेत दे रहे हैं।
नहीं चेते तो गंभीर होंगे परिणाम
गौतमबुद्ध नगर के कई स्थानों पर डेढ़ दशक पहले तक 20 फीट नीचे पानी निकल आता था। अब यह लगातार नीचे जा रहा है और 130 फीट से अधिक पहुंच गया है। यदि अभी भी लोग नहीं चेते तो पानी के लिए तरसना पड़ेगा। साथ ही बारिश और भूकंप से शाहबेरी जैसे हादसों का खतरा बढ़ जाएगा।
कहां कितना औसत भूजल स्तर
ग्रेनो एक्सप्रेसवे 70 से 80 फीट
नोएडा फेज-एक 100 से 130 फीट
नोएडा फेज-दो 80 से 100 फीट
नोएडा फेज-तीन 100 से 130 फीट